
जमशेदपुर : टाटा स्टील को 500 से अधिक और 50,000 से कम कर्मचारियों के साथ ’बड़े संस्थानों’ की श्रेणी में भारत में कार्य करने के लिए एक महान स्थान के रूप में प्रमाणित किया गया है. ग्रेट प्लेस टू वर्क इंस्टीच्यूट के वार्षिक प्रमाणन ने टाटा स्टील के ’हाई-ट्रस्ट, हाई-परफार्मेंस कल्चर वाले एक संस्थान के निर्माण की दिशा में इसके कार्य को सम्मानित किया. टाटा स्टील के वीपी एचआरएम सुरेशदत्त त्रिपाठी ने कहा कि एक और वर्ष के लिए ग्रेट प्लेस टू वर्क के रूप में प्रमाणित होने का गौरव प्राप्त हुआ है. टाटा स्टील एक ऐसे संस्थान के निर्माण में विश्वास करती है, जो आस्था और कर्मचारी सशक्तीकरण की एक संस्कृति को बढ़ावा देने को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है. यह मूलभूत दर्शन टाटा स्टील में वर्षो से अपरिवर्तित रहा है और कंपनी ने इसे बदलते समय एवं कर्मचारी आकांक्षाओं के साथ प्रासंगिक बनाए रखने का काम किया है. इन वर्षो में, टाटा स्टील ने अपने कर्मचारियों के विभिन्न खंडों के लिए 5 दिन के कार्य सप्ताह, मासिक धर्म अवकाश, पितृत्व अवकाश, दत्तक अवकाश, सैटेलाइट कार्यालय संचालन, कर्मचारी सहायता कार्यक्रम और टेक-2 (कॅरियर ब्रेक पर टाटा स्टील के कर्मचारियों के पार्टनरों और महिला पेशेवरों को एक मंच प्रदान करने के लिए) जैसे कई पाथ-ब्रेकिंग नीतियों, अभ्यासों और प्रथाओं और पहलों की शुरुआत की है. टाटा स्टील ने अपनी विविध और समावेश की पहल ’मोजाइक’ वर्ष 2015 में शुरू की गई थी. यह भी कंपनी द्वारा जन-उन्मुखी समावेशी संस्कृति बनाने के लिए अपनाए गए मार्ग को परिभाषित करती है.
इस माह की शुरुआत में, टाटा स्टील ने एक नई मानव संसान नीति (एचआर पॉलिसी) तैयार की, जो एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के सहकर्मियों को अपने पार्टनर (विवाहित जोड़े की तरह रहने वाले समान लिंग के लोगों) की घोषणा करने और कानून के तहत सभी मानव संसान लाभों का लाभ उठाने में सक्षम बनाती है. हर साल, 60 से अधिक देशों के 10,000 से अधिक संस्थान और संगठन अपने कार्यस्थल की संस्कृति को मजबूत करने के लिए मूल्यांकन, बेंचमार्किंग और योजनाबद्ध कार्यो के लिए ग्रेट प्लेस टू वर्क इंस्टीच्यूट के साथ जुड़ते हैं. ग्रेट प्लेस टू वर्क इंस्टीच्यूट की विधि को सख्त और उद्देश्पूर्ण कार्य संस्कृति मूल्यांकन प्रक्रिया के रूप में मान्यता प्राप्त है. इसे महान कार्यस्थल संस्कृतियों की पहचान और सम्मानित करने में गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है.






