जमशेदपुर : टाटा स्टील के जमशेदपुर प्लांट में कोक प्लांट के बैटरी नंबर 6 के चिमनी और कोल टावर को ध्वस्त कर दिया गया. 110 फीट की चिमनी और 48 फीट की एक कोल टावर को कुछ सेकंड में ही ध्वस्त कर दिया गया. आपको बता दें कि टाटा स्टील को बैटरी नम्बर 5,6,7 को बदल कर नया बैटरी 6ए और 6बी लाने वाली है. इसकी क्षमता एक मिलियन टन होगा. रविवार को विस्फोट जमशेदपुर वर्क्स के कोक प्लांट में अप्रचलित गगनचुंबी सुविधाओं को खत्म करने की प्रक्रिया के पूरा होने का प्रतीक है, जिसके लिए कई पहल की गई. दुनिया में अपनी तरह की पहली इंजीनियरिंग प्रक्रिया में, टाटा स्टील ने एक ऑपरेटिंग स्टील प्लांट में इन विस्फोट गतिविधियों को अंजाम दिया, जिसमें मेगा स्ट्रक्चर शामिल थे, जो भारत में सबसे ऊंचे थे. 12 मीटर ऊंचाई की एक मॉडल रिपेयर शॉप का पहला विस्फोट 4 सितंबर, 2022 को किया गया था. (नीचे भी पढ़ें और वीडियो देखें)
ऑपरेशनल प्लांट के अंदर सुरक्षित संचालन प्रक्रिया स्थापित करने के लिए और 27 नवंबर, 2022 को कंपनी ने कोक प्लांट में एक अप्रचलित 110 मीटर लंबी चिमनी (बैटरी #5 चिमनी) को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. रविवार को 48 मीटर ऊंचे कोल टावर के साथ 110 मीटर ऊंचाई की एक और कंक्रीट चिमनी (बैटरी नम्बर 6 चिमनी) को एक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से नष्ट कर दिया गया. ये विस्फोट टाटा स्टील के कॉन्ट्रैक्ट पार्टनर एडिफिस इंजीनियरिंग इंडिया और जेट डिमोलिशन साउथ अफ्रीका की मदद से किए गए थे. 110 मीटर लंबी चिमनी को बेहतरीन इंजीनियरिंग के नमूना के तहत नष्ट किया गया. जैसे ही विस्फोट किया गया वैसे ही एक तरफ पूरी चिमनी नीचे चली गई. यह कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. धूल को नियंत्रित करने के लिए ‘पानी के फववारे ‘ का इस्तेमाल किया गया और कंपन को कंट्रोल करने के लिए बड़ा गड्ढा बनाया गया था. (नीचे भी पढ़ें और वीडियो देखें)
साथ ही, ‘स्टील के तारों की जाली’ के इस्तेमाल से मलवा बिखरने से रोका गया. इन विस्फोटों से उत्पन्न कंक्रीट के मलबे को पीसीसी, दीवार और सड़क निर्माण में रीसायकल किया जाएगा. इस पूरे काम में ड्रोन की मदद ली गई थी. टाटा स्टील के वीपी सेफ्टी संजीव पाल ने कहा कि कोक प्लांट में चिमनी और अन्य चीजों को हटाने का सारा काम काफी सफलतापूर्वक पूरा हुआ है. इसमें सेफ्टी और एनवायरनमेंट का पूरा ख्याल रखा गया है. टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट टीक्यूएम इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट अवनीश गुप्ता ने बताया कि तकनीक का इस्तेमाल करते हुए एक बेहतर तरीके से टाटा स्टील के विकास की गाथा लिखी जा रही है. इसके विकास को और आगे बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है जो काफी सफल रहा है.




