भुवनेश्वर : टाटा स्टील कलिंगानगर प्लांट के कर्मचारियों के बोनस समझौता को लेकर टाटा स्टील कलिंगानगर यूनाइटेड यूनियन की ओर से चार्टर ऑफ डिमांड्स सौंपा गया है. कंपनी की चीफ पीपुल ऑफिसर के नाम भेजे गये प्रस्ताव में यह मांग की गयी है कि बोनस एक्ट और इंडस्ट्रियल एक्ट के तहत उनको भी बोनस की राशि दी जाये. इन लोगों ने डिमांड किया है कि टाटा सटील कलिंगानगर का अलग से बोनस समझौता किया जाये क्योंकि कर्मचारियों ने यहां काफी बेहतर उत्पादकता का प्रदर्शन किया है और कंपनी का मुनाफा भी बढ़ा है. (नीचे भी पढ़ें)
टाटा स्टील कलिंगानगर यूनियन ने डिमांड किया है कि अलग से उनके साथ बोनस का समझौता किया जाये. एक साथ समझौता करना गलत होगा क्योंकि सभी प्लांट का अलग अलग प्रदर्शन और मुनाफा होता है और उनकी उत्पादकता होती है. इन लोगों ने मांग की है कि कर्मचारियों को पिछले वित्तीय वर्ष के मुनाफा के आधार पर इस साल 19 फीसदी बोनस दिया जाये क्योंकि टाटा स्टील कलिंगानगर प्लांट में काफी बेहतर प्रोडक्शन और मुनाफा हुआ है. बोनस की 20 फीसदी सीलिंग के बाद अतिरिक्त राशि का भी भुगतान किया जाये, जैसे पहले दिया गया था. इन लोगों ने कहा है कि टाटा स्टील के कलिंगानगर प्लांट में कर्मचारियों की नयी बहाली हुई है, जिसमें डीए काफी कम है. ऐसे मेंउनका बोनस काफी कम हो जायेगा. ऐसे कर्मचारियों को भी वर्तमान डीए की दर से बोनस की राशि की गणना कर बोनस दिया जाये. यह प्रस्ताव टाटा स्टील कलिंगानगर यूनाइटेड यूनियन के उपाध्यक्ष रजीत कुमार बेहरा की ओर से दिया गया है. गौरतलब है कि टाटा स्टील में जमशेदपुर प्लांट में ही बोनस समझौता होता था, जिसके आधार पर अलग अलग प्लांट में बोनस की राशि का वितरण होता था और समझौता उसी आधार पर हो जाता था. लेकिन अब कलिंगानगर में अपने स्तर पर बोनस समझौता की मांग उठ गयी है, जिससे प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ सकती है.



