जमशेदपुर : टाटा स्टील लगातार विस्तार कर रही है. इसके साथ ही टाटा स्टील ने दो साल में अपने कर्ज को भी कम करने में कामयाबी पायी है. वर्ष 2020 में जहां कंपनी का कर्ज 1.04 लाख करोड़ रुपये था, वह जून 2022 तक घटकर 54504 करोड़ रुपये हो चुका है.यह जानकारी टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन ने फार्च्यून इंडिया को दिये गये एक इंटरव्यू में जानकारी दी है. श्री नरेंद्रन ने इस दौरान अपनी भावी रणनीति का भी खुलासा किया है. उन्होंने बताया है कि टाटा स्टील का वैश्विक प्रोडक्शन 32 मिलियन टन के करीब है. इसके तहत नेट प्रोफिट को 2,43,959 करोड़ रुपये तक किया जा चुका है, जो दो साल पहले तक 40154 करोड़ रुपये था. जब से टाटा स्टील के एमडी के तौर पर टीवी नरेंद्रन ने अपना पदभार संभाला है, कंपनी का नेट प्रोफिट 51.26 फीसदी के करीब बढ़ गया है जबकि रेवेन्यू में भी 16.70 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. एमडी ने कहा है कि भारत में स्टील की खपत 300 मिलियन टन तक जा सकता है, जिसमें टाटा स्टील करीब 60 मिलियन टन तक हो सकता है. श्री नरेंद्रन ने कहा कि दस सालों में देश में स्टील का डिमांड 250 मिलियन टन तक जा सकता है, जिसके लिए टाटा स्टील भी अपना विस्तार करेगी. उन्होंने बताया कि टाटा स्टील कलिंगानगर में 5 मिलियन टन तक का विस्तार कर रही है. अभी वहां 3 मिलियन टन है यानी कुल 8 मिलियन टन तक इसका विस्तार हो जायेगा. इसके बाद कलिंगानगर प्लांट को 16 मिलियन टन का विस्तार किया जाना है. उन्होंने बताया है कि 3500 एकड़ जमीन टाटा स्टील के पास है. उन्होंने यह भी बताया है कि 12100 करोड़ रुपये में नीलांचल इस्पात की खरीद की गयी है, जिसका 1 मिलियन टन की क्षमता है, वहां भी 2500 एकड़ जमीन है, जहां विस्तार किया जा सकता है. भूषण प्लांट के अधिग्रहण के बाद 3 मिलियन टन के प्लांट को 5 मिलियन टन तक कर लिया गया है, जिसको बढ़ाकर 10 मिलियन टन तक किया जाना है. एमडी ने इस बात की जरूर जानकारी दी है कि जमशेदपुर प्लांट में वे लोग प्रोडक्शन को बढ़ाना नहीं चाहते है. जमशेदपुर प्लांट शहर के बीचोबीच है, इस कारण इसको हम लोग ज्यादा विस्तार नहीं कर सकते है. टाटा स्टील को 2045 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन करने के लक्ष्य के तहत काम कर रहे है. टाटा स्टील अपने विस्तार पर आने वाले सालों में करीब 12 हजार करोड़ रुपये तक का निवेश करने जा रही है.





