जमशेदपुर : टाटा स्टील मेरामंडली ने ब्लास्ट फर्नेस 1 में अपनी अभूतपूर्व कोक ओवन गैस (सीओजी) इंजेक्शन परियोजना शुरू की है. यह भारतीय इस्पात उद्योग में अपनी तरह की पहली पहल है. यह पहल वर्ष 2045 तक नेट ज़ीरो हासिल करने के टाटा स्टील के दृढ़ संकल्प को रेखांकित करती है और कम-कार्बन वाले लौह एवं इस्पात उत्पादन के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने में कंपनी के नेतृत्व को दर्शाती है. टाटा स्टील के ग्रैफीन, न्यू मैटेरियल बिजनेस, आरएंडडी टेक्नॉलॉजी वाइस प्रेसिडेंट सुबोध पांडेय ने कहा कि बाहरी जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए प्रोसेस गैसों का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करने की यह पहल, सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग में टाटा स्टील की लीडरशिप को और मज़बूत करती है. हम लो-कार्बन टेक्नोलॉजी के प्रदर्शन और उनके व्यापक स्तर पर उपयोग पर निरंतर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिससे वर्ष 2045 तक नेट ज़ीरो की दिशा में हमारी यात्रा को और तेज किया जा सके. टाटा स्टील मेरामंडली वाइस प्रेसिडेंट ऑपरेशंस सुधीर कुमार मेहता ने कहा कि यह परियोजना इस बात का अच्छा उदाहरण है कि हमारी टीमें पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए दक्षता बढ़ाने के नए तरीकों की निरंतर तलाश करती हैं. ब्लास्ट फर्नेस प्रक्रिया में कोक ओवन गैस का प्रभावी उपयोग करके हम अपने परिचालन को अधिक कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बना रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)
किसी एकीकृत स्टील प्लांट में सीओजी—जो हाइड्रोजन और हाइड्रोकार्बन से भरपूर बाय-प्रोडक्ट गैस है-का आमतौर पर बिजली उत्पादन, हीटिंग के लिए उपयोग किया जाता है या इसे बस जलाकर खत्म करने (फ्लेयरिंग) के लिए किया जाता है. टेक्नोलॉजी पार्टनर मेसर्स पॉल वुर्थ-एसएमएस और इक्विपमेंट सप्लायर मेसर्स कोबेल्को के सहयोग से, टाटा स्टील ने ब्लास्ट फर्नेस में ट्यूयर्स के माध्यम से सीओजी इंजेक्शन को सफलतापूर्वक लागू किया है. इसमें जीवाश्म ईंधन के स्थान पर सीओजी का रिडक्टेंट के रूप में उपयोग किया जाता है, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है. जीवाश्म ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के अलावा, यह ब्लास्ट फर्नेस को तीन-ईंधन प्रणाली के साथ संचालित करने का एक अनूठा अवसर भी प्रदान करता है, जिससे ऑपरेशन में लचीलापन और दक्षता बढ़ती है. इसके अतिरिक्त, एडवांस्ड इंजेक्शन टेक्नोलॉजी के सुरक्षित और स्थिर संचालन के माध्यम से यह पहल ग्रीन स्टील उत्पादन के क्षेत्र में टाटा स्टील के नेतृत्व को और मजबूत करती है. टाटा स्टील कम-कार्बन ब्लास्ट फर्नेस तकनीकों को अपनाने में अग्रणी रही है और ब्लास्ट फर्नेस में कोल बेड मीथेन, हाइड्रोजन और बायोचार इंजेक्शन का सफलतापूर्वक प्रदर्शन कर चुकी है.





