जमशेदपुर : टाटा स्टील ने टीयूटीआर हाइपरलुप के साथ एक अहम समझौता पर हस्ताक्षर किया. आइआइटी मद्रास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया. भारत में हाइपरलुट तकनीक को बड़े पैमाने पर विकसित करने और उसके इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में टाटा स्टील और टीयूटीआर हाइपरलुप कंपनी साथ मिलकर काम करेगी. डिजाइन, मैटेरियल सेलेक्शन समेत अन्य बिंदूओं पर फोकस करते हुए यह दोनों कंपनियां साथ मिलकर रिसर्च का काम करेगी. टाटा स्टील डिजाइन और डेवलपमेंट में स्टील के उपयोग की दिशा में काम करेगा ताकि ज्यादा से ज्यादा बेहतर नयी तकनीक विकसित हो और नये प्रयोग के जरिये कम खर्च पर हाइपरलूट जैसी तकनीक कैसे भारत में लाया जा सके. नये मैटेरियल बिजनेस में कदम रख चुकी टाटा स्टील के लिए भी यह बेहतर अवसर है. टाटा स्टील के पास स्टील एवं कंपोजिट मैटेरियल्स की डिजाइन एवं विकास में खास विशेषज्ञता है. भविष्य के लिए तैयार सस्टेनेबल व्यवसाय को विकसित करने के अपने रणनीतिक इरादे के अनुरूप, टाटा स्टील ने हाइपरलूप की पहचान भविष्य की गतिशीलता के क्षेत्र में एक उपयुक्त महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी के रूप में की है. टूटर, आईआईटी मद्रास, भारत से निकला एक डीपटेक स्टार्टअप है, जो इस क्षेत्र में अग्रणी है तथा अपने प्रमुख मूल्य प्रस्ताव के रूप में कम लागत वाले हाइपरलूप समाधान का वादा करती है. टूटर में पॉड एवं प्रोपल्शन सिस्टम डिज़ाइन में अद्वितीय ताकत है. टाटा स्टील एवं टूटर व्यावसायीकरण के लिए प्रौद्योगिकी को संयुक्त रूप से डिजाइन, विकसित और स्केल करने का लक्ष्य रखते हैं. पहले चरण का काम आईआईटी मद्रास में 50 मीटर टेस्ट ट्रैक पर होगा. 10 किलोमीटर के ट्रैक को हासिल करने के बाद के काम को चरण II और III में पूरा किया जाएगा, जिसमें ऑटोमोटिव, कंस्ट्रक्शन एवं इंजीनियरिंग क्षेत्रों के अन्य उद्योग भागीदारों का एक कंजोर्टियम शामिल होगा. (नीचे भी पढ़ें)
क्या है हाइपरलूप तकनीक, क्या है भविष्य
हाइपरलूप तकनीक ऐसी है, जो दुनिया में कहीं से किसी व्यक्ति पैसेंजर या वस्तुओं को कम समय में सुरक्षित और कुशलतापूर्वक स्थानांतरित कर सकता है. इसका पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा. एलन मस्क ने हाइपरलूप तकनीक का पहली बार विचार 2012 और 2013 में रखा गया था. इस तकनीक के माध्यम से लगभग एक हजार किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से यह पॉड दौड़ती है. हाइपरलूप आ जाने से मुंबई से पुणे के बीच की दूरी 25 मिनट में तय होगी जबकि रांची और टाटा के बीच की दूरी 15 मिनट में ही पूरी हो जायेगी. हाइपरलूप में एक ट्यूब मॉड्यूलर ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जो कि घर्षण से मुक्त होकर चलेगा. यह सिस्टम एक यात्री या कारगो वाहन को एयरलाइन की गति से एक स्तरीय ट्यूब के माध्यम से निकट वैक्यूम में एक रैखिक विद्युद मोटर का उपयोग करके गति प्रदान करता है. यह कम जगह लेता है. रेलवे और हवाई यात्रा से बेहतर माना जाता है. सड़क यातायात से भी बेहतर है और यह पर्यावरणस्नेही है. टाटा स्टील के वीपी टेक्नॉलॉजी व न्यू मैटेरियल बिजनेस डॉ देबाशीष भट्टाचार्जी ने बताया कि हम लोग देशी तकनीक के जरिये बेहतर कॉमर्शियल इस्तेमाल करना चाहते है. इस दिशा में यह समझौता कारगर साबित होगा. सस्टेनेबल बिजनेस और भविष्य का भारत बनाने में यह एक कारगर भूमिका निभायेगी. टीयूटीआर हाइपरलुप के सीइओ व कोफाउंडर आर बालाजी ने बतााय कि टाटा स्टील जैसे संस्था से जुड़ने से लाभ होगा और बेहतर विकल्प के तौर पर भारत में हाइपरलुप काम करने लगेगा.




