जमशेदपुर : टाटा स्टील ने कंस्ट्रक्टस्टील के साथ साझेदारी में, जो वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन का स्टील कंस्ट्रक्शन मार्केट-डेवलपमेंट प्रोग्राम है, एक अग्रणी स्टील-आधारित ज़ीरो एनर्जी बिल्डिंग (जेडइबी) का उदघाटन किया. यह भवन उन्नत लाइट-गेज स्टील फ्रेम (एलजीएसएफ) तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है. टाटा स्टील के सीइओ एवं मैनेजिंग डायरेक्टर टीवी नरेंद्रन ने 1,836 वर्ग फीट की इस आधुनिक सुविधा का उदघाटन किया, जिसमें वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन (वर्ल्ड स्टील) के डायरेक्टर जनरल डॉ एडविन बैसन भी उपस्थित थे. केवल 3.5 महीनों में निर्मित यह सुविधा भारत की नेट-ज़ीरो, ऊर्जा-कुशल और जलवायु-प्रतिरोधी अवसंरचना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतीक है. टीवी नरेंद्रन ने कहा कि स्टील-आधारित ज़ीरो एनर्जी बिल्डिंग निर्माण के भविष्य का प्रतिनिधित्व करती है. कंस्ट्रक्टस्टील के साथ हमारी साझेदारी यह दिखाती है कि आधुनिक, ऊर्जा-कुशल और कम-कार्बन समाधान को भारत भर में बड़े पैमाने पर अपनाया जा सकता है और इसे प्रमुख अवसंरचना में शामिल किया जा सकता है. (नीचे भी पढ़े)

एलजीएसएफ (एलजीएसएफ) तकनीक में, सटीक रूप से निर्मित स्टील सेक्शंस को फ्रेम की तरह जोड़ा जाता है, जिससे भवन में न्यूनतम वायु रिसाव, बेहतर इन्सुलेशन और ऊर्जा हानि में कमी सुनिश्चित होती है. स्टील संरचना को हल्का, निर्माण में तेज और अत्यंत टिकाऊ बनाता है, जबकि इसकी रिसाइकल करने की क्षमता लंबी अवधि में पर्यावरणीय प्रभाव को कम करती है. स्टील-आधारित ज़ीरो एनर्जी बिल्डिंग इस तरह डिज़ाइन की गई है कि यह अपनी पूरी ऊर्जा जरूरत खुद ही पूरा कर सके. यह भवन अल्ट्रा-लो ऑपरेशनल ऊर्जा मांग के साथ ऑन-साइट नवीनीकृत ऊर्जा उत्पादन को जोड़ता है, जिससे यह सालाना शुद्ध-शून्य ऊर्जा उपयोग सुनिश्चित करता है. भवन में उच्च प्रदर्शन वाली ग्लेज़िंग, अच्छी तरह इन्सुलेट किए गए दीवार और रूफ पैनल, और जहां संभव हो प्राकृतिक वेंटिलेशन का उपयोग किया गया है. ऑन-साइट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए रूफटॉप सोलर पैनल और बिल्डिंग-इंटीग्रेटेड फोटोवोल्टिक्स (बीआइपीवी) का इस्तेमाल किया गया है. इसके अलावा, वर्षा जल संचयन और कम-प्रवाह वाली फिटिंग्स भवन में जल उपयोग को अधिकतम दक्षता के साथ कम करने में मदद करती हैं.


