जमशेदपुर : टाटा स्टील ने चालू वित्तीय वर्ष 2026 – 2027 के प्रथम तिमाही (अप्रैल से जून 2026) का वित्तीय परिणाम जारी कर दिया है. गुरुवार को हुई बोर्ड मीटिंग में इसके आंकड़ों को मंजूरी दी गयी. इसके बाद इसकी जानकारी बीएसइ और एनएसइ से साझा की गयी. कंपनी ने वैसे तो समूह में कम मुनाफा कमाया है, लेकिन भारत में कंपनी ने तगड़ा कारोबार किया है. कंपनी का मुनाफा अगर बढ़ा है तो सिर्फ भारत में निवेश के कारण ही बढ़ा है. कंपनी के वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्तीय वर्ष के अप्रैल से जून 2026 तक में कंपनी का उत्पादन 7.69 मिलियन टन रहा जबकि इसी अवधि में पिछले साल 7.33 मिलियन टन रही. वहीं, स्टील की डिलीवरी 7.27 मिलियन टन इस वित्तीय वर्ष के प्रथम तिमाही में रही जबकि बीते साल इसी समय में 7.12 मिलियन टन का डिलीवरी हुआ था. कंपनी का टर्नओवर में भी बढ़ोत्तरी हुई है. समूह का टर्नओवर बढ़कर 60794 करोड़ रुपये हो गया है जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में इसी तिमाही में 53178 करोड़ रुपये हो गया है. कंपनी के समूह का टैक्स देनदारी के पहले का मुनाफा 9370 करोड़ रुपये अप्रैल से जून 2026 तक में रहा जबकि अप्रैल से जून 2025 तक में 7480 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था. समूह का टैक्स समेत देनदारी के बाद का मुनाफा 2385 करोड़ रुपये इस साल रहा जबकि पिछले साल अप्रैल से जून 2025 तक में 2007 करोड़ रुपये रहा. टाटा स्टील ने भारत में जबरदस्त कारोबार किया है. कंपनी ने अप्रैल से जून 2026 तक में भारत में 5.76 मिलियन टन का उत्पादन किया जबकि अप्रैल से जून 2025 में 5.23 मिलियन टन का उत्पादन हुआ था. वहीं, भारत में स्टील डिलीवरी अप्रैल से जून 2026 तक में 5.17 मिलियन जबकि अप्रैल से जून 2025 तक में 4.75 मिलियन टन रहा. कंपनी का इस वित्तीय वर्ष के प्रथम तिमाही में भारत में टर्नओवर 36989 करोड़ रुपये रहा जबकि पिछले साल अप्रैल से जून 2025 तक में 31137 करोड़ रुपये रहा. भारत में टैक्स देनदारी के पहले का मुनाफा अप्रैल से जून 2026 तक में 9908 करोड़ रुपये रहा जबकि अप्रैल से जून 2025 में मुनाफा 7486 करोड़ रुपये रहा वहीं, भारत में टैक्स समेत देनदारी के बाद का मुनाफा अप्रैल से जून 2026 तक में 4668 करोड़ रुपये रहा जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-2026 अप्रैल से जून में 3454 करोड़ रुपये रहा था. कंपनी का तगड़ा मुनाफा दर्ज हुआ है. टाटा स्टील की बोर्ड मीटिंग में ओडिशा के नीलाचल इस्पात में 33873 करोड़ रुपये का निवेश करेगी. कंपनी का विस्तार करने की मंजूरी दी गयी. टाटा स्टील के एमडी सह सीइओ टीवी नरेंद्रन ने कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर बताया कि वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) के घटनाक्रमों के कारण सप्लाई चेन में आए व्यवधान और इनपुट कॉस्ट (कच्चे माल की लागत) में बढ़ोतरी के बावजूद टाटा स्टील ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है. कंपनी ने लगातार तीसरी तिमाही में अपने प्रति टन (ऑपरेटिंग प्रॉफिट) में क्रमिक सुधार दर्ज किया है. श्री नरेंद्रन ने प्रदर्शन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि विपरीत वैश्विक परिस्थितियों और ओवरसीज (विदेश स्थित) प्लांटों में परिचालन संबंधी अड़चनों के बावजूद भारतीय बाजार टाटा स्टील के मजबूत प्रदर्शन की रीढ़ बना हुआ है. भारत में कंपनी की घरेलू डिलीवरी सालाना आधार पर 11 प्रतिशत बढ़कर 4.85 मिलियन टन तक पहुंच गई है. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने बताया कि कंपनी की फुर्तीली कॉमर्शियल रणनीति और बेहतर मार्केट मिक्स के कारण प्रति टन नेट स्टील रियलाइजेशन में पिछली तिमाही की तुलना में 5,991 रुपये का शानदार इजाफा दर्ज किया गया. ऑटोमोटिव एंड स्पेशल प्रोडक्ट्स सेगमेंट ने अपना अब तक का ”सर्वश्रेष्ठ प्रथम तिमाही का प्रदर्शन” दिया है. इसमें हाई-एंड प्रॉडक्ट्स की बिक्री में सालाना आधार पर 21 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई है. टाटा स्टील के री-बार और शीट ब्रांड्स टाटा टिस्कोन और टाटा स्टीलियम की बिक्री में सालाना 30 फीसदी से अधिक की धमाकेदार वृद्धि हुई है. टाटा स्टील के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ”आशियाना” और ”डिजी-ईसीए” ने इस तिमाही में लगभग 2,200 करोड़ रुपये का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू हासिल किया, जो पिछले साल से 61 फीसदी अधिक है. कंपनी अपने हाई-मार्जिन और ब्रांडेड लॉन्ग प्रॉडक्ट्स (जैसे छड़, वायर रॉड्स) के बाजार में अपनी पकड़ और मजबूत करने जा रही है, श्री नरेंद्रन ने बताया कि टाटा स्टील के निदेशक मंडल ने नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड के 4.8 मिलियन टन प्रति वर्ष के विस्तार प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. यह विस्तार कंपनी की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा है. (नीचे भी पढ़ें)
इसके अलावा टाटा स्टील ने शिपबिल्डिंग, डेटा सेंटर और कंटेनर निर्माण जैसे नए व उभरते सेक्टर्स में भी अपनी मौजूदगी मजबूत की है. ब्रिटेन सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए ”सेफगार्ड उपायों से वहां के स्टील मार्केट को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है. हालांकि इसका असर अलग-अलग प्रॉडक्ट कैटेगरी पर अलग रहेगा. कंपनी घरेलू उत्पादकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए यूके सरकार से लगातार बातचीत कर रही है. नीदरलैंड्स में ”डायरेक्ट शीट प्लांट” को सुरक्षित, नियमों के अनुरूप और स्थाई रूप से दोबारा शुरू करने के लिए कंपनी वहां के स्थानीय पर्यावरण अधिकारियों के साथ मिलकर तकनीकी उपायों पर काम कर रही है.




