
जमशेदपुर : टाटा स्टील की ओऱ से बिजनेस-स्कूलों के लिए होने वाले वार्षिक बिजनेज चैलेंज स्टील-ए-थॉन के सातवें संस्करण का समापन हो गया. इस चैंपियनशिप में एक्सआइएम भुवनेश्वर की टीम प्रो-नार्डस ने बाजी मारी. वहीं एमडीआइ गुरुग्राम की टीम गॉड स्पीड रनर-अप रही. एफएमएस दिल्ली की मैन-एगर्स ऑफ स्टील और एक्सआइएम भुवनेश्वर से टीम रैप्सोडी दूसरे रनर-अप रहे. हर साल की तरह इस साल भी आयोजित चैंपियनशिप में देश भर से कुल 27 प्रीमियर बिजनेस स्कूलों से 3000 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन प्राप्त हुए. टीम के चयन के लिए 10 बिजनेस केस के साथ प्रस्तुत करना था. इसमें लगभग 500 टीमों ने अपने केस समाधान प्रस्तुत किए, जिनमें से 38 मामलों प्री-फिनाले के लिए चुना गया था. इसमें माक्रेटिंग एंड सेल्स, सस्टेनबिलिटी, कारपोरेट कम्यूनिकेशन, एचआर जैसे केस शामिल थे.

19 दिसंबर को होने वाले ग्रांड फिनाले में टॉप 10 में जाने वाली टीम को टाटा स्टील की ओर से चयनित किया गया और उन्हे प्राइज मनी के साथ सर्टिफिकेट दिया गया. यह कार्यक्रम ऑनलाइन आयोजित किया गया था. टाटा स्टील मार्केटिंग एंड सेल्स के वाइस प्रेसिडंट पीयूष गुप्ता ने बताया कि काफी सालों से यह देखा गया है कि प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्रों के अंदर संचार औऱ कौशल पर विशेष रुप से ध्यान दिया जाता है, जो भविष्य के लिए काफी जरुरी भी है. स्टील-ए-थान छात्रों की व्यापार समस्याओं पर काम करने और उसे समक्षने के लिए एक अच्छा प्लैटफार्म है. इस साल देखा गया कि नए औऱ सामान्य विचारों में नई संचार कथा शामिल थी. यह देखकर खुशी होती है कि डब्लयूएचएफ की चुनौती के बावजुद केस समाधान के लिए नई सोंच के साथ अच्छी तरह से शोध किया जाता है.

उन्होने सभी टीमों की सराहना भी की.इस दौरान वीपी एचआरएम (नामित) अतरई एस सान्याल ने बताया कि बिजनेस स्कूलों के छात्रों के प्रोफेशनल कैरियर में धार लाने के अलावा होने वाले बदलावों से रुबरु होने के लिए इस तरह का आयोजन किया जाता है. इससे काफी लाभ लोगों को होता है. स्टील-ए-थॉन जैसे आयोजन से युवाओं को बेहतर रास्ता मिलता है और इससे सबको लाभ होता है. इस टीम के चैंपियन को 2.50 लाख रुपये का कैश प्राइज दिया गया जबकि एक ट्राफी और सर्टिफिकेट भी दिया गया. पहले रनर अप को 1.50 लाख रुपये और दूसरे रनर अप को 1 लाख रुपये के साथ सर्टिफिकेट दिया गया. इनको प्री-प्लेसमेंट ऑफर और इनटर्नशिप के लिए भी ऑफर दिया गया. इसके लिए फाइनालिस्ट को 30 हजार रुपये, सर्टिफिकेट के साथ सम्मान भी दिया गया.




