
जमशेदपुर : टाटा वर्कर्स यूनियन में जातिगत राजनीति का विरोध शुरु हो चुका है. यूनियन के पूर्व डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह द्वारा जातिगत आधारित राजनीति किये जाने का विरोध शुरू हो चुका है. इस मामले को लेकर चल रही बारगेनिंग की खबरों को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है. टाटा स्टील के एमइडी इलेक्ट्रिकल सर्विसेज के कमेटी मेंबर एके सिन्हा ने सारे कमेटी मेंबरों के लिए खुला पत्र लिखा है और जातिगत राजनीति का विरोध किया है. कमेटी मेंबर एके सिन्हा के खुला पत्र को www.sharpbharat.com अपनी रिपोर्ट में हुबहू लगा रहा है, पढ़ें.
”प्रिय साथियों,
किसी भी राष्ट्र, समाज या संस्था की प्रगति में उसके नेतृत्व की प्रखर भूमिका होती है. नेतृत्वकर्ता में दूरदृष्टि,सम्यक दृष्टि, विचारशीलता, ओजस्विता एवं सबको साथ लेकर चलने की क्षमता होनी चाहिये. लोकतंत्र में नागरिक ही नेतृत्व का चयन करते हैं. अतः लोकतंत्र में एक आम नागरिक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. एक विचारशील, प्रगतिशील नागरिक ही एक अच्छे नेतृत्व का चयन करते हैं. यदि हम इसे यूनियन के संदर्भ में देखें तो हमारी यानी कमेटी मेंबरों (यूसीएम) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. हमें यह जिम्मेदारी लेनी होगी की हम अपने नेतृत्व का सही चयन करें जो आगे चलकर कर्मचारियों और यूनियन की गरिमा को और आगे ले जाने में सक्षम हो. नेतृत्वकर्ता किसी खास वर्ग, जाति या धर्म का चहेता ना हो अपितु यूनियन के सभी सदस्यों और कमेटी मेंबरों का चहेता व सर्वमान्य नेता होना चाहिये. नेतृत्वकर्ता कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने वाला और यूनियन की गरिमा एवं साख को बचाने और बढ़ानेवाला होना चाहिये. हमें यह याद रखना चाहिये की हम सभी उस यूनियन के हिस्सा हैं, जिसका नेतृत्व महान स्वतंत्रता सेनानी आदरणीय सुभाष चंद्र बोस जी प्रोफेसर अब्दुल बारी जैसे अनेक प्रगतिशील नेताओं ने किया था. अतः हमें अपने नेता का चुनाव तमाम संकीर्णताओं से परे उठकर करना चाहिये.
आपका,
एके सिन्हा,
कमेटी मेंबर, टाटा वर्कर्स यूनियन
एमइडी इलेक्ट्रिकल सर्विसेज”






