
जमशेदपुर : टाटा वर्कर्स यूनियन के चुनाव में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने है. एक दूसरे पर दोनों पक्ष ने अपना वार तेज कर दिया है. इस कड़ी में सत्ता पक्ष (आर रवि प्रसाद, अरविंद पांडेय, शैलेश सिंह और शहनवाज आलम की टीम) की टीम के सहायक सचिव नितेश राज ने बयान जारी किया है. उन्होंने कहा है कि सोमवार को यूनियन के वर्तमान महामंत्री एवं पूर्व डिप्टी प्रेसिडेंट का बयान आया था. उन लोगों ने बताया है कि तीन महीने से वे (नितेश राज) उनके पीछे पड़ा था. नितेश राज ने कहा कि अगर तीन महीनों से उनके पीछ पड़ा था तो उन लोगों ने आज इन बातों को क्यों सार्वजनिक किया. जहां तक सभी को पता है कि पूर्व डिप्टी प्रेसिडेंट संजीव चौधरी टुन्नु को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार भी इन तीन महीनों में ही इन लोगों ने घोषित किया है. इन दिनों ने सामाजिक औपचारिकता और धार्मिक अनुष्ठान का राजनीतिक इस्तेमाल कर बहुत ही गंदा काम किया है. वर्तमान महासचिव सतीश सिंह एवं पूर्व डिप्टी प्रेसिडेंट संजीव चौधरी टुन्नु का मीडिया में विपक्ष बन जाना भी हास्यास्पद है. जिस व्यक्ति ने आज तक यूनियन की हर बारगेनिंग में भाग लिया एवं हर समझौते को मूर्तरूप देकर उस पर हस्ताक्षर किया उस व्यक्ति का विपक्ष का रूप धारण कर लेना सवालों के घेरे में है. जो लोग अपने किये गए कार्यों की जिम्मेदारी से भाग रहे हैं उन्हें आने वाले चुनाव में मजदूर कोई भी जिम्मेदारी नहीं देंगे.

दूसरी ओर, विपक्षी टीम का बिष्टुपुर में टीम टुन्नु और सतीश के समर्थक कमेटी मेंबरों की बैठक उपाध्यक्ष हरिशंकर सिंह की अध्यक्षता में हुई. इस बैठक में प्रमुख रूप से आर रवि प्रसाद के कार्यकाल और उनके चट्टे-बट्टे पदाधिकारियों द्वारा अब तक की गई भ्रष्टाचार पर गंभीर मंथन हुआ और इस पर मजदूरों के बीच जाकर विस्तार से सबूतों के साथ प्रचारित करने का निर्णय लिया गया. भ्रष्टाचार के अन्य मामलों के अलावा प्रमुख रूप से इसमें विभिन्न क्लब हाउसों में, जिनका संचालन करता तो यूनियन है पर जिस के आय-व्यय का ब्यौरा न कमेटी मेंबरों को दिया जाता है. भ्रष्टाचार के मामले में बिष्टुपुर क्लब हाउस सबसे आगे है, जिसका संचालन ज्यादा करते हैं और नाम का उपाध्यक्ष भगवान सिंह करते हैं, जिसमें टेंट हाउस को फिक्स करने से लेकर सफाई के नाम पर 500 रुपये से लेकर 1000 रूपया वसूलने के अलावा अपने रिश्तेदारों को परिवार समेत क्लब हाउस में रखने एवं इसके मॉडिफिकेशन पर खर्च के नाम पर घपला करने से जब इनका पेट नहीं भरा तो अब क्लब हाउस के ही पीछे अपने स्वामित्व में एक सांड को बांधकर उससे भी प्रतिदिन पैसा कमाने की इनकी कवायद जारी है. यूनियन के ठीक सामने आवंटित कंपनी के क्वार्टर में एक ओर जहां इन्होंने लगभग पूरे घर को भाड़े में लगाकर कमाई का तगड़ा जरिया बना रखा है. वहीं इनके सामने बागान में यूनियन आसपास लगने वाले खोमचे वाले अपना ठेला एकमुश्त राशि देकर रखते हैं. बहुत दुर्भाग्य की बात है कि ऐसे खाऊ-पकाऊ यूनियन पदाधिकारी बड़ी शान से आखिर कैसे किसी के चरित्र की बातों का दंभ भरते हैं और किसी के सम्मान हनन से थोड़ा भी परहेज नहीं करते हैं ? ग़ौरतलब हो कि एक ओर सत्ता के चाटूकारिता जहां इनके स्वभाव का अभिन्न अंग है वहीं सत्ता पलटते ही नए नेतृत्व की तारीफ़ और विपक्ष को गाली देने में इनको महारत हासिल है. एचएसएम विभाग से चुने जाने वाले भगवान सिंह ये अपने ही विभाग का रीऑर्गेनाइजेशन जहां पिछले 27 वर्षों में करा नहीं पाए थे और अपने कट्टर सिंगल वोटर और सीनियर को बाईपास करके स्वयं प्रमोशन ले लिया एवं री-ऑर्गेनाइजेशन में स्वयं के लिए एक स्पेशल इंक्रीमेंट जुगाड़ किया, अब इनके वोटरों के बीच इनकी साख बुरी तरह से गिर चुकी है एवं एचएसएम के सभी नौ कमेटी मेंबर उनके घोर विरोधी हो चुके हैं. विपक्ष की पूरी टीम ऐसे नाकाबिल, मौकापरस्त और भ्रष्टाचार में लिप्त पदाधिकारियों का भंडाफोड़ मजदूर समाज के सामने करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस बार यह दुर्भाग्य ही होगा अगर लोग हमारे इस प्रतिष्ठित यूनियन में दोबारा निर्वाचित होकर आ जाए. बैठक में संजय कुमार सिंह, संतोष कुमार सिंह, समरेश कुमार सिंह, मनोज कुमार झा, अजय कुमार, तरुण कुमार, संजीव तिवारी, संजय कुमार सिंह पिलेट प्लांट, अजय चौधरी, दिनेश कुमार, अभिनंदन सिंह, अभिनंदन कुमार सिंह, सरोज कुमार सिंह समेत 20 कमेटी मेंबर उपस्थित थे.




