
जमशेदपुर : जमशेदपुर में तेज हवा, आंधी और तूफान के कारण रविवार को भी कई स्थानों पर बड़े-बड़े पेड़ गिर गए. सबसे चौंकाने वाली घटना टाटा स्टील की अधिकृत यूनियन टाटा वर्कर्स यूनियन में घटी. टाटा वर्कर्स यूनियन में करीब 100 साल से खड़ी बरगद का पेड़ जमीन से उखड़ कर सीधे गिर गया. गनीमत तो यह रही कि इस पेड़ की चपेट में ना कोई जान माल का नुकसान हुआ और ना ही कोई हताहत हुआ. लेकिन इस पेड़ का एक अपना इतिहास भी रहा था. इस पेड़ को टाटा वर्कर्स यूनियन के सियासी राजनीति में विपक्ष का पेड़ कहा जाता था क्योंकि इन्हीं पेड़ों के नीचे टाटा वर्कर्स यूनियन में विपक्ष की राजनीति का खेल होता था. चूंकि, सत्ता पक्ष के लोग अपने-अपने चेंबर में बैठते थे जबकि विपक्ष के लोग इसी पेड़ के नीचे बैठकर अपनी राजनीतिक गोटियां सजाते थे. इसके अलावा विपक्ष के लोग यदि पेड़ के नीचे बैठकर मजदूरों और कमेटी मेंबरों के साथ संपर्क साधते थे और मीटिंग करते थे. इस पेड़ के गिरने को लेकर टाटा वर्कर्स यूनियन की राजनीति से जोड़कर इसको देखा जा रहा है क्योंकि एक तरह से देखा जाए तो टाटा वर्कर्स यूनियन में विपक्ष धराशायी है और जिस तरह से पेड़ भी धराशाई हो गई है, इसको यह कहा जा रहा है कि यह प्रकृति का एक संकेत है कि टाटा वर्कर्स यूनियन में सियासत की राजनीति में विपक्ष लगभग खत्म है, इस कारण इस पेड़ ने भी अपना स्थान छोड़ दिया. आपको बता दें कि टाटा वर्कर्स यूनियन में स्वर्गीय वीजी गोपाल के समय से ही विपक्ष की राजनीति इसी पेड़ के नीचे सजती थी. टाटा वर्कर्स यूनियन में काफी लंबे समय तक विपक्ष की राजनीति करने वाले पूर्व सहायक सचिव और पूर्व महामंत्री बीके डिंडा इसी पेड़ से नीचे से राजनीतिक सफर शुरू करते हुए इस मुकाम पर पहुंचे कि वे टाटा वर्कर्स यूनियन के महामंत्री के पद को भी संभाला. ऐसे कई पदाधिकारी हैं जो इसी पेड़ के नीचे यूनियन की राजनीति का ककहरा सीखा और फिर राजनीति के शिखर पर पहुंचे. चाहे टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नू हो या महामंत्री सतीश सिंह उन लोगों ने भी इसी पेड़ के नीचे से अपनी राजनीति को और मजबूत किया था. आपको बता दें कि टाटा वर्कर्स यूनियन की राजनीति में विपक्ष नाम की चीज कुछ भी नहीं रही है. विपक्ष सिर्फ नाम का रह गया है, जो न मुद्दे पर विरोध करता है और ना मजदूर हित को लेकर आवाज उठाता है. सारे कमिटी मेंबर और सारे पदाधिकारी अपनी ड्यूटी बजाने और किस तरह ड्यूटी में रिलीज मिल जाना है, इस पर ही काम करते हैं. यही वजह है कि विपक्ष धराशाई हो चुका है और इसी स्थिति को बयां कर रहा है यह बरगद पेड़ का गिरना.



