
रांची : नवगठित झारखंड सरकार ने पथ निर्माण विभाग की अनियमितताओं एवं निविदा घोटालों पर कारवाई आरंभ कर दी है। पथ निर्माण के अभियंता प्रमुख एवं कतिपय अन्य अभियंताओं को निलंबित किया गया है तथा बड़े पैमाने पर निविदाओं को रद्द कर दिया गया है। यह कार्रवाई स्वागत योग्य है, परंतु इतना ही पर्याप्त नहीं है। इस अवधि में पथ निर्माण विभाग के प्रभारी मंत्री जो उस समय मुख्यमंत्री थे तथा सचिव जो स्वयं मुख्य सचिव थीं की भूमिका की जांच भी जरूरी है। पूर्व मंत्री व जमशेदपुर पूर्वी के निर्दलीय विधायक सरयू राय ने कहा है कि मेरी जानकारी के अनुसार ये दोनों ही पथ निर्माण विभाग में घोटालों और अनियमितताओं की संस्कृति आरंभ करने, नियम विरुद्ध आदेश देने तथा उन आदेशों को क्रियान्वित करने के लिए अधीनस्थ अधिकारियों एवं अभियंताओं पर दबाव डालने के लिए जिम्मेदार हैं। यह भी सूचना है कि पथ निर्माण विभाग में हुई अनियमितताओं की जांच 01 जनवरी 2016 से करने का आदेश हुआ है। वस्तुतः यह जांच 01जनवरी 2014 से होनी चाहिए, क्योंकि पथ निर्माण विभाग से ऐसी अनियमितताओं का दौर उस समय से ही आरंभ हुआ था। इसके साथ ही जांच का दायरा भवन निर्माण एवं ऊर्जा विभाग तक बढ़ाया जाना चाहिए। श्री राय ने कहा है कि पथ निर्माण विभाग को अनियमितताओं के बारे में मैंने तत्कालीन मुख्यमंत्री को 11 मार्च, 2018 को पत्र लिखा था। इसके पूर्व 24 अगस्त, 2017 को भी पीत पत्र के द्वारा उन्हें सूचित किया था। सचिव, पथ निर्माण विभाग को इस बारे में 28 मार्च, 2018 को सप्रमाण सूचित किया था तथा 26 जुलाई, 2018 को भी पथ निर्माण विभाग की कार्य संस्कृति के बारे में सचिव, पथ निर्माण विभाग को पत्र भेजा था। इसके अतिरिक्त गुवा-सलाई रोड की अनियमितताओं तथा एनजीटी द्वारा इस बारे में तत्कालीन पथ निर्माण सचिव एवं मुख्य सचिव को कारवाई के लिए भेजे गये आदेश का भी जिक्र किया था। परंतु, मेरे पत्रों में अंकित बिंदुओं पर कोई कारवाई नहीं हुई। नतीजा हुआ कि अनियमितताओं का दायरा बढ़ता गया और निविदाओं के निष्पादन में अनियमितता को सांस्थिक रूप दे दिया गया। श्री राय ने इस बारे में गहन जांच के लिये एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की है।






