रामगोपाल जेना, चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिला भाजपा की ओर से रविवार को कैफेटेरिया, चाईबासा में एमएमडीआर संशोधन विधेयक को लेकर प्रेस वार्ता आयोजित की गई. प्रेसवार्ता को पूर्व सीएम रघुवर दास ने संबोधित किया. रघुवर दास ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस खनिज संपदा एवं एमएमडीआर संशोधन को लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि खनिज क्षेत्र में उत्पादन और निवेश बढ़ेगा तो रोजगार के साथ-साथ राज्य को रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम और अन्य मदों से राजस्व प्राप्त होगा. श्री दास ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जैसे खनिज संपदा से समृद्ध जिले में अनेक लौह अयस्क खदानें वर्षों से बंद हैं. उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2023 में झारखंड की 15 लौह अयस्क/ लौह अयस्क-मैगनीज खनन लीज में केवल 7 कार्यरत थीं. उन्होंने कहा कि यदि बंद खदानों का समयबद्ध नीलामी और वैधानिक प्रक्रियाओं के बाद संचालन हो, तो राज्य के राजस्व और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिल सकता है. उन्होंने डीएमएफ /डीएमएफटी को लेकर भी राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने खनन प्रभावित क्षेत्रों और प्रभावित लोगों के विकास के लिए डीएमएफ की व्यवस्था की, ताकि पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर राशि खर्च हो. (नीचे भी पढ़े)
कैग के अनुसार मार्च 2023 तक झारखंड के डीएमएफटी में 4,003.51 करोड़ जमा हुए थे, जबकि ₹1,826.46 करोड़ खर्च किए गए. रघुवर दास ने आरोप लगाया कि इस राशि का अपेक्षित लाभ खनन प्रभावित आदिवासी और मूलवासी परिवारों तक नहीं पहुंच रहा तथा योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता है.उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि खनन प्रभावित गांवों में शुद्ध पेयजल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और रोजगार के लिए डीएमएफ की राशि का कितना उपयोग हुआ. जिस पैसे पर पहला अधिकार खनन प्रभावित जनता का है, उसकी बंदरबांट किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती.पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि खदानों की नीलामी और संचालन में अनावश्यक देरी से वैध खनन तथा राजस्व को नुकसान होता है और अवैध उत्खनन को अवसर मिलता है. उन्होंने कहा कि अवैध खनन से जुड़े लोगों और राजनीतिक संरक्षण के आरोप समय-समय पर समाचारों में सामने आते रहे हैं. उन्होंने मांग की कि सरकार पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराए और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई करे. रघुवर दास ने कहा कि आयरन ओर से लेकर कोयला क्षेत्र तक झारखंड की खनिज संपदा राज्य की आर्थिक ताकत बन सकती है, लेकिन इसके लिए पारदर्शी नीलामी, समयबद्ध खनन, पर्यावरणीय नियमों का पालन और डीएमएफ राशि का जनहित में उपयोग जरूरी है. (नीचे भी पढ़े)
उन्होंने कहा कि जिस सरकार ने आदिवासी-मूलवासी के अधिकार और विकास के नाम पर सत्ता हासिल की, उसे बताना चाहिए कि खनिज संपदा से मिलने वाले लाभ का वास्तविक फायदा गांवों तक क्यों नहीं पहुंच रहा. उन्होंने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाते हुए कहा कि “आज ऐसा कोई विभाग नहीं है, जहां भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने नहीं आ रही हों. श्री दास ने कहा कि विकास और शासन के मुद्दे पर वह अपने पांच वर्ष के मुख्यमंत्री कार्यकाल और वर्तमान हेमंत सरकार के छह वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों एवं कार्यों पर किसी भी सार्वजनिक मंच पर तथ्यात्मक बहस के लिए तैयार हैं. उन्होंने जनता से अपील की कि राजनीतिक नारों के बजाय खनिज, रोजगार, राजस्व, डीएमएफ, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के वास्तविक आंकड़ों के आधार पर सरकार के काम का मूल्यांकन करें.प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई, जिलाध्यक्ष गीता बालमुचू, पूर्व जिलाध्यक्ष संजय पांडे, प्रदेश कार्यकारी सदस्य सतीश पुरी, महामंत्री भूषण पाठ पिंगुआ, पूर्व जिलाध्यक्ष मनीष राम, पूर्व विधायक जवाहरलाल बानरा एवं जिला मीडिया प्रभारी जितेंद्र नाथ ओझा उपस्थित रहे.




