रामगोपाल जेना/चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त चंदन कुमार ने शनिवार को सोनुआ प्रखंड के पन्सुआ गांव स्थित पन्सुआ डैम का निरीक्षण किया और ग्रामीणों के साथ संवाद कर क्षेत्र की समस्याओं की जानकारी ली. निरीक्षण के दौरान पोड़ाहाट वन प्रमंडल पदाधिकारी नीतीश कुमार, उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार, अपर उपायुक्त प्रवीण केरकेट्टा, पोड़ाहाट-चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी श्रुति राजलक्ष्मी सहित अन्य पदाधिकारी उनके साथ मौजूद रहे. (नीचे भी पढ़ें)

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने जलाशय से खेतों की सिंचाई के लिए बनाए गए दाएं और बाएं दोनों कैनालों के प्रारंभिक बिंदु का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने कैनाल गेट की स्थिति और उसमें हो रहे लीकेज की समस्या की जानकारी भी संबंधित अभियंताओं से ली. साथ ही, डीसी ने सोनुआ ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत बनाए गए इनटेक वेल के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त की. (नीचे भी पढ़ें)

उपायुक्त ने चक्रधरपुर जलपथ प्रमंडल के अभियंता को आगामी शनिवार तक कैनाल गेट की मरम्मत और लीकेज की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए तकनीकी विभाग से समन्वय कर डैम मैप, प्राक्कलन और विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत कराने का निर्देश दिया. (नीचे भी पढ़ें)

इस दौरान उपायुक्त ने वन प्रमंडल पदाधिकारी और अपर उपायुक्त के साथ जलाशय परिसर में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने को लेकर भी चर्चा की. साथ ही, उन्होंने चक्रधरपुर शहरी जलापूर्ति योजना के अंतर्गत निर्मित जलशोधन संयंत्र का भी निरीक्षण किया. निरीक्षण के बाद आयोजित संवाद कार्यक्रम में पन्सुआ गांव के निवासियों ने सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और सोनुआ ग्रामीण जलापूर्ति योजना से जुड़ी समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया. (नीचे भी पढ़ें)

ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उपायुक्त चंदन कुमार ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए ही आज उन्होंने जलाशय क्षेत्र का निरीक्षण किया है. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन सभी खामियों को सूचीबद्ध कर उनके समाधान के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि पन्सुआ जलाशय का अधिकतम लाभ किसानों और ग्रामीणों को मिले, इसके लिए जलाशय में पानी का संचय और ठहराव सुनिश्चित करना जरूरी है. (नीचे भी पढ़ें)

उपायुक्त ने बताया कि सबसे पहले कैनाल गेट की मरम्मत और लीकेज की समस्या दूर करने को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके बाद चरणबद्ध तरीके से सिंचाई नहर का पक्कीकरण, भू-अर्जन से जुड़े कार्य तथा जलापूर्ति योजनाओं से संबंधित समस्याओं का समाधान किया जाएगा.







