
चाईबासा: झारखंड में भले ही लाल मिट्टी, बालू के उत्खन्न तथा लॉटरी टिकट के कारोबार पर पूर्ण रूप से सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है, बावजूद लाल मिट्टी का खेल आयरन ओर माफियाओं के द्वारा धड़ल्ले से किया जा रहा है. साथ ही गरीब-गुरबा तथा समान्य लोगों की पहुंच से बालू दूर है, पर पैसे वालों के घरों में आज भी अवैध रूप से बालू पहुंच जाता है. ठीक इसी तरह अवैध रूप लॉटरी टिकट का कारोबार भी बे रोक-टोक धड़ल्ले से चल रहा है. यदी इन सबका संचालन देखना हो तो पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा में आये दिन दिखा जा सकता है. हलांकि वैसी बात नहीं कि पुलिस द्वारा इन सभी काले कारनामों को रोकने के लिए कार्रवाई नहीं की जाती, बल्कि कार्रवाई के नाम पर केवल वैसे लोग पकड़े जाते हैं, जो इन काले कारोबार के मुख्य संचालक के गुर्गे होते है. उनकों पकड़ा जाता है, जबकी पकड़े जाने वाले लोगों के द्वारा मुख्य संचालकों के नामों का भी खुलाशा होता है, लेकिन काले कारनामों का मुख्य सरगना तक आज तक पुलिस नहीं पहुंच पायी है. वैसे काले कारनामों में कुछ सफेद पोश लोगों का शह भी परदे के पीछे से रहता है.
रही बात अवैध लाटरी टिकट के खेल की, तो इस गोरख धंधे में शहर के तीन मुख्य संचालक हैं जिसमें प्रजापति नामक एक व्यक्ति एक मुख्य संचालक का मैनेजर है और पूर्व में दो बार जेल भी जा चुका है तथा बड़ा नीमडीह व मिशन स्कूल के समीप के क्षेत्र में अवैध लॉटरी चलाता है. इसी प्रकार जिला के बिरसा चौक के समीप, बड़ी बाजार गणेश मंदिर तथा मंगला हाट व बस स्टैंड में यह धंधा चलता है. मुख्य रूप से दिहाड़ी मजदूर, मोटिया मजदूरी वाले लोग और टोटो चालक इस माया जाल में फंस कर अपनी दिन भर कमाई पानी की तरह उड़ा देते हैं, क्योंकि एक बार नंबर फंस गया तो फिर लाखपति नहीं तो करोड़पति बन जाने का लालच होता है। यदा कदा यदि किसी का नंबर फंस भी गया, तो दिहाड़ी मजदूर या टोटो चालकों को मिलने से दूर रहता है. इस बात को लेकर लॉटरी टिकट बेचने वालों और खिलाड़ियों के बीच कई बार हाथा-पाई भी हो जाती है.







