रामगोपाल जेना/चाईबासा : चाईबासा सदर प्रखंड अंतर्गत पहाड़ की तराई में बसे बोंडोलगुट्टू (पंडावीर) में प्रकृति-सृजन की खुशी पर सिंहबोंगा को धन्यवाद अर्पित करने का महान मागे पोरोब हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. मौके पर ग्रामवासियों ने अपने परिचित एवं परिजनों के साथ मांदल-नगाड़े की थाप पर सामूहिक नृत्य किया. (नीचे भी पढ़ें)

इस दौरान पारंपरिक गीत ‘बुरू कोते बकइया कना, गाड़ा कोते जंगिया कना, निमिन बुगिन दिसुम रेबु जोनोमा कना’ (वनों से आच्छादित, नदियों से सजे सुंदर संसार में हमने जन्म लिया है) गीत से पूरे घर-आंगन व वातावरण गुंजायमान होता रहा. इस गीत पर शिक्षक जगन्नाथ हेस्सा ने देसी सारंगी ‘बनम’ एवं प्रोफेसर दिलदार पुर्ती ने बांसु पर संगत कर माहौल को और सरस बना दिया. मौके पर सभी ने मागे पोरोब के खास व्यंजन लेटो का लुत्फ उठाया.(नीचे भी पढ़ें)
मागे पोरोब के शुभ अवसर पर इतिहासकार डॉ ललिता सुंडी एवं शिक्षक विमल किशोर बोयपाई के आमंत्रण पर हो महासभा के केन्द्रीय अध्यक्ष अर्जुन मुंडुइया महिला कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ प्रीतिबाला सिन्हा, डॉ शुचिता बाड़ा, डॉ डोरिस मिंज, डॉ अंजुबाला खाखा, डॉ अर्पित सुमन टोप्पो, डॉ पप्पू यादव, डॉ अरुणा कुमारी, प्रो चंद्रमोहन हेम्ब्रम, प्रो रिंकी दोराई, प्रो दिलदार पुरती समेत अनेक शिक्षक-शिक्षिकाएं कृष्णा देवगम, दामू सुंडी, संजय कुमार जारिका, विद्यासागर लागुरी, गणेश बिरुआ, जगन्नाथ हेस्सा, सिकंदर बुड़ीउली, मंगल सिंह मुंडा, तुईबीर मुंडा, मैथ्यू देवगम, जगदीश बोयपाई, सरस्वती बोयपाई, पप्पू बोयपाई, सुमति सिंह कुंटिया, सरोज देवगम आदि काफी संख्या में मेहमान मौजूद रहे.




