जमशेदपुर: पश्चिम सिंहभूम जिले के सोनुआ थाना क्षेत्र के बोईकाड़ा गांव निवासी गरीब मजदूर एवं आदिवासी पिता श्रीराम चांपिया की ढाई वर्षीय बेटी आरीयाना चांपिया जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है. बच्ची मलेरिया के साथ-साथ शरीर के कई हिस्सों में फैले टीबी संक्रमण से पीड़ित है. गंभीर स्थिति को देखते हुए सोमवार शाम उसे जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल से रांची स्थित रिम्स रेफर कर दिया गया. परिजनों के अनुसार, आरीयाना को पिछले शुक्रवार को मलेरिया, पेट में पानी भर जाने, अत्यधिक कमजोरी और लगातार बिगड़ती हालत के कारण एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इससे पहले करीब एक सप्ताह तक गांव के एक ग्रामीण चिकित्सक से उसका इलाज कराया गया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ. (नीचे भी पढ़ें)

बाद में उसे चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया, जहां बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण एमजीएम अस्पताल भेज दिया गया. सोमवार को एमजीएम अस्पताल के पांचवें तल्ले स्थित आइसोलेशन वार्ड में बच्ची को एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया. चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत बेहद गंभीर है. आगे के उपचार के लिए शिशु रोग विशेषज्ञों और विशेष सर्जिकल सुविधाओं की आवश्यकता थी, जो एमजीएम अस्पताल में उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे रिम्स रेफर किया गया. हालांकि, आर्थिक तंगी इस परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है. बच्ची के पिता श्रीराम चांपिया का कहना है कि लगातार अस्पतालों के चक्कर लगाने और आर्थिक तंगी से वे पूरी तरह टूट चुके हैं. (नीचे भी पढ़ें)
उन्हें आशंका है कि यदि रिम्स में भी इलाज संभव नहीं हुआ तो उनकी परेशानियां और बढ़ जाएंगी. इसी कारण उन्होंने फिलहाल बच्ची को घर ले जाकर पारंपरिक जड़ी-बूटी से उपचार कराने की बात कही है. यह मामला केवल एक परिवार की बेबसी नहीं, बल्कि दूर-दराज के आदिवासी इलाकों में रहने वाले गरीब मरीजों के सामने मौजूद स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों को भी सामने लाता है. यदि स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और राज्य सरकार समय रहते हस्तक्षेप कर बच्ची के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करें, तो एक मासूम की जान बचाई जा सकती है.





