
संतोष वर्मा
चाईबासा : वन संपदा से भरे जगन्नाथपुर अनुमंडल मुख्यालय के जगन्नाथपुर शहरी क्षेत्र में अलग फीडर बनाने के नाम पर बिजली विभाग के पदाधिकारी और संवेदक की सांठ-गांठ से 18 लाख रुपये की निकासी कर लिए जाने का एक मामला प्रकाश में आया है. मजे की बात है कि अलग फीडर का काम हुआ ही नहीं और रुपये निकल गये. वहीं अब इसी कार्य के लिए बिजली विभाग द्वारा नये सिरे से स्टेप एजेंसी नामक संवेदक से अलग फीडर का निर्माण कार्य नई निविदा के अनुसार कराया जा रहा है. जबकी 18 लाख रूपये का लेखा-जोखा विभाग के पास नहीं है कि किस मद में खर्च हुआ है. यदि इस मामले की जांच हुई तो बिजली विभाग में बड़े घोटाले का खुलासा होगा. ज्ञात हो कि वर्ष 2007-08 में ही बिजली विभाग द्वारा जगन्नाथपुर शहरी क्षेत्र के लिए बिजली सुविधा बहाल कराने उद्देश्य से विभाग द्वारा जगन्नाथपुर अलग फीडर बनाने के लिए पहले 12 लाख रुपये का प्राकलन तैयार किया गया था, जिसे बाद में 18 लाख कर दिया गया. इस पर बिजली विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर द्वारा अनुमति दी गई. लेकिन 2007 से ही यह अधूरा पड़ा हुआ है.

इस योजना में नोवामुण्डी, बड़ाजामदा, जगन्नाथपुर व हाटगम्हरिया का काशिम बाजार शामिल था. इस कार्य को पूरा करने के विभाग द्वारा जमशेदपुर के धनंजय सिंह नामक ठेकेदार को ठेका दिया गया था. आज 15 वर्ष बीत गये लेकिन जगन्नाथपुर शहरी क्षेत्र के लिए अलग फीडर काम शुरू नहीं हो पाया है. जबकि इस कार्य को शुरू कराने को लेकर स्थानीय ग्रामीण और समाजसेवी नवाज हुसैन उर्फ बिरसा के द्वारा कई बार अनुमंडल कार्यालय पर घरना-प्रदर्शन किया गया और संवेदक व बिजली विभाग के एसडीओ और ठेकेदार का धेराव कर 18 लाख का हिसाब मांगा गया. लेकिन विभाग की ओर से अबतक सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा है. वहीं करीब 15 साल बाद फिर से इसी काम के लिए विभाग नये सिरे से अलग-अलग एजेंसी को ठेका देकर काम शुरू करा रहा है. जबकि वर्तमान संवेदक द्वारा भी इस निर्माण कार्य में मानक पूरा नहीं कर लोहा पोल न लगा कर सीमेंट वाली पोल गाड़ा जा रहा है. निविदा के अनुसार लोहा का पोल गाड़ना है. इस मामले को लेकर सांसद गीता कोड़ा व स्थानीय विधायक सोनाराम सिंकू ने संवेदक को कार्य में अनियमितता न बरतने की हिदायत दी है.







