रामगोपाल जेना/चाईबासा : तमारिया/तमड़िया जाति के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में झारखंड कार्मिक विभाग द्वारा दर्ज याचिका खारिज हो गई है. इस मामले ने झामुमो-कांग्रेस की इंडिया गठबन्धन की आदिवसीयत मूलवासी हितैषी होने की पोल खोल दी है. उक्त बातें आज आदिवासी मुंडा समाज विकास समिति के जिला अध्यक्ष हरिचरण सांडिल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही. श्री सांडिल ने कहा कि 2013 में चाईबासा दोपाई निवासी लालजीराम तियू ने राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सह खूंटी के तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी कानूराम नाग के विरुद्ध राज्य जाति छानबीन स्क्रूटनी समिति में लिखित शिकायत की थी, जिसमें समिति के अध्यक्ष सह भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राजीव अरुण एक्का एवं सदस्यों ने कानूराम नाग की जाति की छानबीन की. समिति ने श्री नाग की जाति को तमारिया/ तमड़िया जाति होने के बावजूद मुंडा जाति की अर्हता रखने सम्बंधी रिपोर्ट में मोहर लगा दी, लेकिन झारखंड में पदस्थापित गैर आदिवासी अधिकारियों ने एक षडयंत्र रच कर इस मामले को जबरन हाई कोर्ट में इसके विरुद्ध याचिका दायर कर दी. श्री सांडिल ने बताया कि झारखंड हाईकोर्ट के जज गौतम कुमार चौधरी की अदालत ने विगत 19 अप्रैल को तमारिया/तमड़िया जाति को मुंडा की उप जाति को राज्य जाति छानबीन समिति द्वारा स्वीकार किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को सुनवाई के योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया. (नीचे भी पढ़ें)
ज्ञात हो कि इस सम्बन्ध में लालजीराम तियू ने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त और अनुसूचित जनजाति आयोग में वर्ष 2013 में शिकायत की थी. इसके बाद उपायुक्त की जांच रिपोर्ट के आधार पर समिति के पास गये. समिति ने वर्ष 2016 में अपनी रिपोर्ट पेश की जिसमें कहा गया है कि तामरिया/ तमड़िया जाति मुंडा जनजाति की उप जाति है, इसलिए तामरिया/ तमड़िया अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत आती है. इसके बाद रिपोर्ट को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई. उन्होंने कहा कि इस प्रकार एक आदिवासी को 12 वर्षों तक नौकरी से निलंबित कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया. उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर जल्द ही आदिवासी मुंडा समाज विकास समिति के केंदीय अध्यक्ष बुधराम लागुरी से बात कर सरकार के विरुद्ध अदालत में मानहानि का मामला दर्ज किया जाएगा.



