
चाईबासा : आज के ज्ञान आधारित युग में तकनीक का उपयोग विश्वसनीयता और दक्षता को बढ़ाने में कारगर है। निरंतर बढ़ती प्रतिस्पर्धा और स्वयं को बेहतर सिद्ध करने के लिए कंप्यूटर का ज्ञान आज के समय की आवश्यकता और एक बड़ी जरूरत भी है। कंप्यूटर के अनुप्रयोग और तकनीक आधारित ज्ञान की दिशा में पश्चिमी सिंहभूम जिले में उचित मार्गदर्शन और पर्याप्त संसाधनों की कमी थी। कहना गलत नहीं होगा कि पश्चिमी सिंहभूम में सूचना प्रौद्योगिकी और तकनीक के क्षेत्र में ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले नवयुवकों का ज्ञान अल्प था और इस क्षेत्र में उनका दखल नहीं के बराबर था। कंप्यूटर के ज्ञान को सर्वसुलभ बनाने के लिए उपायुक्त के दिशा-निर्देश पर उप विकास आयुक्त के नेतृत्व में डिस्ट्रिक्ट ई-गवर्नेंस सोसायटी ने कंप्यूटर आधारित शिक्षा को सर्वजन सुलभ बनाया। कंप्यूटर का ज्ञान और उसके अनुप्रयोगों को समझने के लिए आज निर्धन परिवार से आने वाले छात्र-छात्राओं को भी बिना किसी शुल्क के प्रशिक्षण दिया जा रहा है। समाहरणालय के प्रथम तल स्थित एनआईसी विंग में अवस्थित 3 कक्षाएं कंप्यूटर के ज्ञानकोष को अविरल बना रही हैं। इन कक्षाओं में 60 कंप्यूटर लगाए गए हैं। प्रतिदिन 24 कक्षाओं का संचालन किया जाता है। प्रत्येक बैच में 30 विद्यार्थी शामिल होते हैं। उप विकास आयुक्त आदित्य रंजन बताते हैं कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य है अच्छी गुणवत्तापूर्ण कंप्यूटर शिक्षा और सॉफ्ट स्किल जिले के सभी इच्छुक छात्र-छात्राओं को सुलभ कराना है। अधिक से अधिक लोगों को कंप्यूटर साक्षरता की इस मुहिम से जोड़ा जाए, ताकि पैसे के अभाव अथवा संसाधनों की कमी के कारण कोई भी तकनीकी ज्ञान से वंचित न रहे।

कार्यक्रम का संचालन महज एक लाख रुपये की लागत से किया गया है। यह कार्यक्रम 60 दिन का है जिसमें 32 मॉड्यूल शामिल हैं, जिनमें कंप्यूटर की सभी मूलभूत संकल्पनाओं की जानकारी दी जाती है। 32 मॉड्यूल के पाठ्यक्रम में आईआईटी/ एनआईटी/बीआईटी जैसे संस्थानों के छात्र कंप्यूटर का ज्ञान और सॉफ्ट स्किल के गुर सिखाते हैं।
रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से लाभदायक साबित हो रहा है कार्यक्रम
जिला प्रशासन ने नवाचार के तहत डिस्ट्रिक्ट ई गवर्नेंस सोसायटी-कंप्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की। आज यह कार्यक्रम आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। डिस्ट्रिक्ट ई गवर्नन्स सोसायटी की शुरुआत इस सोच के साथ की गई थी कि आर्थिक रूप से गरीब और वंचित छात्र छात्राओं को टेक सेवी और जॉब रेडी बनाने के लिए एक अवसर प्रदान किया जाए।
समाहरणालय के कर्मियों के बच्चों को कंप्यूटर सिखाने के साथ शुरू किया गया यह प्रयास आज ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से काफी लाभदायक साबित हो रहा है। डी ई जी एस के तहत पश्चिमी सिंहभूम के 1700 छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक बच्चे कंप्यूटर के प्रयोग में सहज बनें और डिजिटल वर्ल्ड में पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े।






