
रांची : झारखंड की हेमंत सोरेन की सरकार पत्थलगढ़ी के मामले में उलझती नजर आ रही है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार से रिपोर्ट तलब की है. दो सप्ताह में सरकार को रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह जानना चाहा है कि क्या सरकार सही में पत्थलगढ़ी कोलेकर दायर देशद्रोह के मुकदमे को वापस लेना चाहती है. दरअसल, खूंटी के पत्थलगढ़ी को लेकर जेल में बंद चार आरोपी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट से मांग की गयी है कि खूंटी में दायर केस को क्वैश यानी खारिज कर दी जाये. हाईकोर्ट ने इस केस को खारिज यानी क्वैश करने से साफ तौर पर इनकार कर दिया था, जिसके फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी है. गौरतलब है कि झारखंड के खूंटी में पत्थलगढ़ी को लेकर कई लोगों को पुलिस ने जेल भेजा था. फेसबुक पर पत्थलगढ़ी का समर्थन करने वाले चार लोगों घनश्याम बिरुली, एमिल वाल्टर कंडुलना, धर्मकिशोर कुल्लू और जे रिकास कोरा को भी देशद्रोह का मुकदमा करने के बाद जेल भेजा गया था. इस केस को खारिज करने यानी क्वैश करने के लिए पहले इन आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसको हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था. इस फैसले को चुनौती देते हुए सारे आरोपी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एल नागेश्वर राव और हेमंत गुप्ता के समक्ष झारखंड सरकार की ओर से नियुक्त सरकारी अधिवक्ता तापस कुमार सिंह हाजिर हुए. लेकिन उनके पास इसका जवाब नहीं था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है. झारखंड सरकार के अधिवक्ता तापस कुमार सिंह को कहा गया है कि वे सरकार से पूछकर बताये और हलफनामा दायर करें कि क्या सरकार देशद्रोह के मुकदमे को वापस लेना चाहती है. इसकी लिस्टिंग दो सप्ताह के बाद फिर से करने को कहा गया है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में आरोपी जे विकास कोरा के अधिवक्ता जोएल ने कहा था कि झारखंड में नयी सरकार हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बन चुकी है और हेमंत सोरेन की सरकार ने अपने पहली कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया है कि पत्थलगढ़ी आंदोलन के सारे केस वापस लिये जायेंगे. झारखंड हाईकोर्ट ने 22 जुलाई 2019 को पत्थलगढ़ी आंदोलन को लेकर फेसबुक पर पोस्ट करने के मामले में जेल भेजे गये आरोपियों के पीटिशन को खारिज कर दिया था. पत्थलगढ़ी आंदोलन के दौरान खूंटी के सांसद कड़िया मुंडा के तीन पुलिस गार्ड का अपहरण कर लिया गया थख़, जिसको लेकर देशद्रोह का मुकदमा दायर किया गया था. इस पूरे मामले में कुल 20 लोगों को जेल भेजा गया था. गौरतलब है कि झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार बनने के साथ ही पहली कैबिनेट की बैठक में हेमंत सोरेन ने फैसला लिया था कि जितने भी पत्थलगढ़ी के केस है, उसको वापस ले लिया जायेगा. इस फैसले के कुछ ही दिनों के बाद पश्चिम सिंहभूम जिले के गुदड़ी थाना क्षेत्र में एक साथ सात लोगों की हत्या कर दी गयी थी. पत्थलगढ़ी का विरोध करने पर ये सात हत्याएं की गयी थी.








