
जमशेदपुर : जमशेदपुर के सिदगोड़ा स्थित सूर्य मंदिर कमिटी द्वारा नवनिर्मित भव्य राम मंदिर में श्रीराम दरबार के विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा के पश्चात मंदिर के पट आमजनों के दर्शन हेतु खोल दिये गए. शुक्रवार को रात्रि शैयाधीवास में सोए भगवान को जगत कल्याण हेतु जगाया गया. निंद्रा देवी का आह्वान कर मां निंद्रा से प्रार्थना की गई कि हे माँ मोह-माया से मुक्त कर भगवान को जगत कल्याण हेतु मंदिर में विराजमान होने के लिए प्रेरित करें. भगवान को जगाया गया एवं यज्ञशाला की प्रक्रिमा कर प्रतिमाओं का विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा सम्पन्न हुआ. इसके बाद पंचकुंडीय महायज्ञ की पूर्णोहुति एवं आरती की गई. पिछले पांच दिनों से चले आ रहे प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में प्रत्येक अनुष्ठान को पूरे भक्तिभाव से पूरा किया गया. प्राण प्रतिष्ठा समारोह में विभिन्न अनुष्ठान अधिवास कर्म जलाधिवास, गंधाधिवास, पुष्पाधिवास, धान्याधीवास, औषधिवास, फलाधिवास, नगर भ्रमण एवं प्राण-प्रतिष्ठा व यज्ञ की पूर्णोहुति शुक्रवार को सम्पन्न हुई. मंदिर में भगवान श्री राम, मां जानकी, भ्राता लक्ष्मण और रामभक्त हनुमान की संगमरमर की आकर्षक प्रतिमा स्थापित की गई है. श्री राम व अन्य की प्रतिमा खड़े मुद्रा में तथा रामभक्त हनुमान की प्रतिमा अनुसेवक की मुद्रा में स्थापित है. अयोध्या में प्रस्तावित श्रीराम मंदिर के प्रस्तावित मॉडल पर तैयार आकर्षक मंदिर को तीस कुशल कारीगरों द्वारा बनाया गया है जिसके निर्माण में लगभग तीन वर्षों का समय लगा. वहीं मंदिर के दीवारों पर प्रभु श्री राम जी के बालकाल से लेकर राजतिलक की गाथा का वर्णन रंगबिरंगी कलाकृतियों के माध्यम से किया गया है. मंदिर की ऊंचाई 20 फीट है एवं इनमें कुल 24 पिलर हैं. पांच दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा समारोह व पंचकुंडीय यज्ञशाला में 35 आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विभिन्न अनुष्ठान पूरे किए.

संध्याकाल श्रीराम कथे के छठे एवं अंतिम दिन श्रीराम कथा में वनवास प्रसंग व राज्याभिषेक प्रसंग का हुआ वर्णन
व्यास जी ने भगवान राम के वनवास का इतना सचित्र वर्णन किया कि सभी श्रोता भावुक हो गए. भगवान श्रीराम ने अपने कुल की मर्यादा को ध्यान में रखकर व अपने पिता के वचन की रक्षा के लिए प्रसन्न होकर सारा राज-पाट त्याग कर वन चल गये. इससे हमें सीख लेनी चाहिए कि हमें स्वयं की चिंता न करते हुए यदि जरूरत पड़े तो अपने परिवार समाज व देश के लिए सब कुछ त्याग देना चाहिए. कथा व्यास जी ने विविध चौपाईयों के माध्यम से कहा है कि राजा दशरथ ने अपना बुढ़ापा देखकर यह निर्णय लिया है कि अपने समस्त राजपाठ को राम को सौंपकर तपस्या करने चल देना चाहिए, भगवान की भक्ति में मन लगाना चाहिए. वर्तमान परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होने कहा कि आज के बुजुर्गों को राजा दशरथ से प्रेरणा लेनी चाहिए और शरीर में ताकत रहते ही व आंख की रोशनी रहते ही सारी जिम्मेदारी अपने वारिस को सौंपकर भगवान के सुमिरन में लग जाना चाहिए. राजा दशरथ ने अयोध्यावासियों के समक्ष श्री राम के राज्याभिषेक का प्रस्ताव रखा मगर यह कार्य कल पर छोड़ दिया परिणाम काफी दुःखद रहा, इसलिए पुज्य व्यास जी ने कहा कि अच्छे कार्यों को टालने की जगह शीघ्र करना ही श्रेयष्कर होता है. सभी को सदैव प्रसन्न रहने की प्रेरणा भगवान श्रीराम से लेनी चाहिए. भगवान जहां भी रहते हैं प्रसन्न रहते हैं, दुख उनसे कोसों दूर रहता है. कौशल्या के ऊपर प्रकाश डालते हुए पूज्यश्री ने कहा कि बेटे को वनवास होने के बावजूद भी उन्हें अपने पति की वात वचन याद रहे। माँ कौशिल्या नें किसी को दोषी नहीं बताया बल्कि कहा कि यदि मॉ कैकयी ने वन जाने को कहा है तो हे राम वनगमन तुम्हारे लिए सैकड़ो अयोध्या के समान है. वे कहती है कि सुख और दुख तो अपने ही कारणों से होते हैं. भाई हो तो लक्ष्मण जैसा कथा प्रसंग में व्यास जी ने कहा कि भाई हो तो लक्ष्मण जैसा जब भगवान श्रीराम वनवास जा रहे थे तब लक्ष्मण ने अपनी माता से कहा कि मैं भी वनवास जाना चाहता है तो माँ ने कहा कि मैं तो सिर्फ जन्म ही दी हैं लेकिन असली माता-पिता तो राम-सीता हैं. लक्ष्मण भाई श्रीराम के प्रति समर्पित थे. इसलिए व्यास जी ने कहा कि भाई हो तो लक्ष्मण जैसा. जब भगवान श्रीराम लखन एवं सीता सहित बन गमन के लिए निकले तो सभी अयोध्यावासी अपने अपने घरों से भगवान के पीछे निकल पड़े.

अधर्म पर धर्म की विजय असत्य पर सत्य की जीत सदैव होती है
वनवास के पश्चात भगवान श्री राम जब अयोध्या पहुंचे तो आयोध्यावासी खुशियों से झूम उठे श्रीराम कथा के अन्तिम दिवस को कथा व्यास पज्य अतल कृष्ण भारद्वाज जी ने श्रदालुओं से कहा कि रामायण हमें जीने के तरीके सिखाती है. रामायण हमें आदर सेवा भोग, त्याग व बलिदान के साथ दूसरों की सम्पत्ति पर हमारा कोई अधिकार नही है, यह ज्ञान भी देती है. श्री रामकथा की अमृत वर्षा की शुरूआत हुई. व्यास जी द्वारा सीताहरण लंका दहन, राम रावण युद्ध व विभिषण का राज्याभिषेक प्रसंग की व्याख्या मार्मिक ढंग से की कथा प्रसग में पूज्य व्यास जी ने बताया भगवान कण-कण में विराजमान है. अगर हम समाज में दीन दुखियों जरूरत मंदो की सेवा करते है. जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने दीन-दुखियों, यनवासियों आदिवासियों के कष्ट दूर करते हुए उन्हें संगठित करने का कार्य किया एव उस संगठित शक्ति के द्वारा ही समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर किया. उसी प्रकार आज भी समाज में व्याप्त बुराइयों को अच्छे लोगों को संगठित करके ही दूर किया जा सकता है. जब धीरे-धीरे अच्छे लोगों की संख्या बढ़ती जायेगी और संगठित होकर जीने वालों को यश होती जायेगी, तो समाज से बुराइयां भी कम हो जायेगी. व्यास जी ने सभी श्रोताओं से कहा कि जिस तरह श्री राम जी द्वारा वनवासियों को अपने प्रेम से अपना भक्त बनाया था. वनवासियों के कष्ट मिटाये थे। हर राम भक्तों को इस पुनीत कार्य में अपना सहयोग प्रदान करना चाहिए, यह राम कार्य है. कथा के समापन पर पूज्य व्यास जी द्वारा श्री राम के राज्याभिषेक का वर्णन किया और बताया बुराई और असत्य ज्यादा समय तक नहीं चलती अन्ततः अच्छाई और सत्य की जीत होती है अधर्म पर धर्म की जीत हमेशा होती आयी है श्रीराम जी के राज्याभिषेक के प्रसंग के दौरान पूरे पंडाल में पुष्षा की वर्षा भक्तों के द्वारा और सभी भक्त राम जी की भक्ती में जमकर झूमते नजर आए पुज्य व्यास जी द्वारा भजन भी गाये जिस पर मातायें और बहनें भी जमकर झूमती नजर आयी.

कथा समापन एवं श्रीराम दरबार के प्राण-प्रतिष्ठा पूर्ण होने पर 11 हजार दीपक जलाए गए
श्रीराम कथा की समाप्ति व श्रीराम मंदिर में राम दरबार के प्राण-प्रतिष्ठा पूर्ण होने पर सूर्यमंदिर कमिटी की ओर से संध्याकाल में 11 हजार मिट्टी के दीपक प्रज्वलित की गई. कथा में शामिल श्रद्धालुओं ने एक-एक दीपक को खुद से प्रज्वलित किया. कमिटी के अध्यक्ष संजीव सिंह ने बताया कि जिस प्रकार मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम जी के अयोध्या आगमन पर अयोध्यावासियों ने द्वीप जलाकर दीपावली मनाई थी उसी प्रकार सूर्यमंदिर परिसर में श्रीराम कथा के समापन एवं भव्य श्रीराम मंदिर में प्रभु श्रीराम विराजने पर दीपोत्सव मनाकर खुशियाँ मनाई जा रही है. दीपक से कथास्थल समेत पूरा सूर्य मंदिर परिसर प्रकाशवान बना हुआ था. कथा में शामिल श्रोताओं ने हाथों में दीपक लेकर आरती की. श्रीराम कथा में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, प्रदेश संगठन मंत्री धर्मपाल जी, धनबाद विधायक राज सिन्हा, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रदीप वर्मा, आदित्य साहू, बीस सूत्री के पूर्व अध्यक्ष राकेश प्रसाद, सिंदरी विधायक इंद्रजीत महतो, पूर्व विधायक राम कुमार पाहन, प्रशिक्षण प्रमुख गणेश मिश्रा, गायत्री कुजूर, संजीव सिंह, भाजपा जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष दिनेश कुमार, भाजयुमो जिला अध्यक्ष अमरजीत सिंह राजा, गुंजन यादव, कमलेश सिंह समेत हजारों श्रद्धालु उपस्थित थे.







