
राजन सिंह
चाकुलिया : कोरोना वायरस के संक्रमण के मद्देनजर सरकार ने देश और राज्य में लाक डाउन की घोषणा की है. सरकार इस संक्रमण से बचने के लिए लोगों को सैनिटाइजर से हाथ धोने और घर से बाहर न निकले, लोगों से दूरी बनाने और स्वच्छता को अपनाने की बात कह रही है, ताकि कोई भी व्यक्ति इस संक्रमण की चपेट में आने से बच सके. सरकार ने लाक डाउन के समय में पंतायत स्तर पर दीदी किचेन केन्द्र खोला है, ताकि गांव के मजदूर वर्ग और असहाय परिवार भूखे न रहें. इसे देखते हुए दीदी किचेन केन्द्र संचालित किया गया है. वही चाकुलिया प्रखंड की सिमदी पंचायत के किशोरीपुर गांव में स्वच्छता की धज्जियां उड़ रही है और गरीब व असहाय परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है.
गांव में जेएसएलपीएस के महिला समूह द्वारा संचालित दीदी किचेन केन्द्र में लोगों के लिए भोजन खाल के पानी से पकाया जा रहा है. खाल के पानी से पका भोजन ग्रामीण ग्रहण कर रहे हैं और खाल का पानी पी रहे हैं. ऐसे में ग्रामीणों के बीच महामारी फैलने की संभावना बनी हुई है. सरकारी पदाधिकारियों ने अगर इस ओर ध्यान नहीं दिया तो इस महामारी के समय पूरा देश कोरोना से जो जंग लड़ रहा है, वह इस गांव में विफल न हो जाये. इस संबंध में महिला समूह की अध्यक्ष जलनी हांसदा ने कहा कि गांव में दो चापाकल महीनों से ठप हैं. कुआं का पानी पीने योग्य नहीं है और भोजन भी देर से पकता है. इस कारण समूह की सदस्य खाल में बने चुआं से पानी लाकर भोजन पकाती हैं और वही पानी पीने के लिए दिया जाता है. इस संबंध में बीडीओ लेखराज नाग ने कहा कि चापाकल खराब है इसकी सूचना नहीं है. वह चपाकल की मरम्मत कराने की दिशा में जल्द ही पहल करेंगे, ताकि लोगों को स्वच्छ पेयजल मिल सके और खाना बन सके. विधायक समीर महंती भी दीदी किचेन का निरीक्षण करने पहुंचे, तो समिति की महिलाओं ने समस्या से अवगत कराकर जल्द समाधान करने की मांग की है. विधायक ने आश्वस्त किया है कि जल्द ही विभागीय पदाधिकारी से मिलकर ठप पड़े चापाकल की मरम्मत कराने का प्रयास करेंगे.

खाल का पानी पीने को विवश 130 परिवार
चाकुलिया : आज दुनिया इंटरनेट से जुड़ी है, सरकार हर गांव और वर्ग के लोगों की विकास होने की बात कहती है, परंतु आज 21वीं सदी में भी चाकुलिया प्रखंड का एक ऐसा गांव है जहां लोग आज भी विकास से कोसो दूर हैं. गांव के ग्रामीण आज भी पीने के पानी के लिए कूपन नदी (खाल) पर निर्भर हैं. आज पूरा देश और राज्य कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ चाकुलिया प्रखंड की सिमदी पंचायत के किशोरीपुर गांव के ग्रामीण सरकारी पदाधिकारी और जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण पानी के संकट से लड़ रहे हैं. गांव की दोलारानी सिंह, सावित्री पाल, मनीराम हांसदा, रायमुनी हेम्ब्रम व अन्य ने बताया कि गांव में 130 परिवार के बीच सिर्फ दो चापाकल और एक सरकारी कुआं है. लोगों ने बताया कि गांव के दोनों चापाकल महीनों से ठप है और कुआं का पानी खारा है. इस कारण गांव के ग्रामीण उक्त कुआं का पानी पीने के प्रयोग में नहीं लाते हैं. ग्रामीणों ने कहा कि गांव में पानी का दूसरा कोई विकल्प नहीं हैं जिस कारण पीने के लिए खाल से पानी लाते हैं.
खाल में चुंआ खोद कर लेते हैं पानी : ग्रामीण
किशोरीपुर की महिलाओं ने बताया कि वे सभी सुबह और शाम में खाल किनारे जाते हैं और खाल में खोदे गये चुआं से पीने के लिए पानी लाती हैं. महिलाओं ने कहा कि खाल किनारे बालू हटाकर चुआं खोदती हैं और उसमें से कटोरा के सहारे चुआं से पानी निकालकर गगरी और डेकची में पानी भरकर घर लाती हैं. खाल के बीच में ग्रामीणों द्वारा पानी के लिए 7-10 फुट का गड्डा खोदा गया है और गड्डे में छोटा 3-4 रिंग डाला गया है ताकि वहां पानी जमा रहे और ग्रामीण पीने के लिए पानी ले सकें.








