
जमशेदपुर : पूरे देश में कोरोना वायरस के खतरे से निबटने के लिए सबसे बड़ा काम यह था कि सभी को क्वारंटाइन में रखना. इसके तहत दूसरे देश या प्रदेशों से आये लोगों को होम क्वारंटाइन रखा गया था तो कई लोगों को सरकारी क्वारंटाइन में रखा गया था. इसके तहत जमशेदपुर में 12,228 लोगों को क्वारंटाइन में रखा गया था, जिसमें से करीब 7000 लोगों का क्वारंटाइन का समय पूरा हो गया. सबसे सुखद खबर यह रही कि किसी को कोई परेशानी नहीं हुई. जहां दुनिया में लाखों जाने गयी, वहीं, जमशेदपुर में कोई भी बीमार नहीं रहा और न कोई संक्रमण किसी को फैल पाया. यह जनता और प्रशासन की सूझबूझ का ही नतीजा है कि इस तरह का सुखद खबर आया. ऐसे ही कई केस की स्टडी करने का प्रयास किया कि कैसे ऐसे लोगों ने 14 दिन एक घर में या एक कमरे में या एक स्थान पर रहकर 14 लोगों को पकड़ा गया. जिले में करीब 700 लोगों को सरकारी क्वारंटाइन में रखा गया था. इसके अलावा बाद बाकि सारे लोगों को होम क्वारंटाइन में रखा गया था. जो लोग यह 14 दिन पार कर चुके है, वे लोग सबसे बड़ी लड़ाई जीतने में कामयाब हुए है. वैसे आपको बता दें कि जमशेदपुर में अब तक एक भी कोरोना पोजिटिव मरीज नहीं मिला है, जो सुखद खबर है. यह सब जानते है कि एक दूसरे से दूरी बनाकर रहे तो निश्चित तौर पर इसका फैलाव हम लोग रोक सकते है औरसरकारी गाइडलाइन का पालन करते रहे तो इस तरह की बीमारियों से जीत निश्चित है. वैसे कई लोगों को क्वारंटाइन सेंटर के अलावा घरों में क्वारंटाइन रखा गया तो कई लोगों को आइसोलेशन में भी रखा गया.
मजदूर नेता राकेश्वर पांडेय पत्नी संग मुंबई से वापस आने पर विभागीय सलाह पर खुद को किया था क्वारंटाइन
मजदूर नेता राकेश्वर पांडेय ने कहा कि कोरोना के कारण जब क्वारंटाइन में रहने की सलाह रांची एयरपोर्ट पर डाक्टरों ने दिया था तो थोड़ा नर्वस हो गया था. लेकिन घर आने पर दृढ़ संकल्प के साथ खुद व पत्नी को क्वारंटाइन में रखा और ईश्वर की कृपा से सब ठीक हो गया. अभी इस संक्रमणकाल में जरूरतमंदों की बीच जाकर हर संभव मदद करने की कोशिश भी कर रहा हूं.
14 दिनों के बाद माता-पिता को पैर छूकर किया प्रणाम
गोलमुरी के युवक ने बताया कि वह महाराष्ट्र के एक निजी कंपनी में इंजीनियर है. झारखंड में जब एक भी कोरोना के मरीज नहीं थे तब वहां 70 से अधिक मरीजों की पुष्टि हो चुकी थी, जिसके कारण वहां से डरकर जमशेदपुर चला आया. यहां आने पर टाटानगर स्टेशन पर जांच हुई और इसके बाद महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया. यहां पर चिकित्सकों ने जांच की और अगले 14 दिनों तक क्वारंटाइन में रहने को कहा. इसके बाद वे अंदर से काफी डर गये थे. सीधे घर गया और एक कमरे में बंद हो गया. यहां तक की मम्मी-पापा से भी नहीं मिला. कमरे में किसी को आने की इजाजत नहीं दे रखा था. 15 वां दिन पूरे होने पर उन्होंने अपनी मां और पिता को पैर छूकर प्रणाम किया और आंखें भर आई.
आइसोलेशन वार्ड में दिन-रात ले रही थी भगवान का नाम
गुमला की एक युवती कोलकाता में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थी. वह कोलकाता से जमशेदपुर आई तो यहां उसे एमजीएम के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर लिया गया. उस दौरान वार्ड में सिर्फ दो संदिग्ध मरीज ही भर्ती थे। दूसरी एक महिला थी जबकि पूरा वार्ड खाली था. देखकर काफी डर लगता था. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नमूना लेकर कोरोना जांच के लिए भी भेजा. अंदर से काफी डरी व सहमी हुई थी, लेकिन, तीसरे दिन जब एक चिकित्सक ने आकर बताया कि आपकी रिपोर्ट निगेटिव है तब जाकर राहत की सांस ली. अंदर से इतनी खुशी मिली कि शायद ही जिंदगी में उससे अधिक कभी खुशी हुई होगी. पांच दिन तक मैं आइसोलेशन वार्ड में भर्ती रही. लेकिन जरा भी नींद नहीं आई. दिन-रात भगवान का नाम जपती रही. अस्पताल से छुट्टी मिली तो ऐसा लगा मानो दूसरी जिदंगी मिली है.





