
जमशेदपुर : कोरोना वायरस (कोविड-19) के तहत टाटा स्टील के कर्मचारी लॉकडाउन के दौरान ”फरिश्ता” बनकर उभरे है. डिजिटल तरीके से टाटा स्टील के कर्मचारी बच्चों तक पहुंचे है. लॉकडाउन अवधि के दौरान समुदाय के कमजोर व जरूरतमंद लोगों के कुछ समूहों के साथ जुड़ने के लिए टाटा स्टील फाउंडेशन ने ‘फरिश्ता’ नामक एक पहल आरंभ की है. इस पहल ने डिजिटल स्पेस के माध्यम से टाटा स्टील के कर्मचारियों के लिए स्वेच्छा सेवा का एक मार्ग खोला है. ‘मस्ती की पाठशाला’ के तहत पिपला में गर्ल्स रेसीडेंशियल कैंप स्कूल की आठ वर्षीय छात्र रूपाली माझी उन कई विद्यार्थियों में से एक है, जो इस पहल के माध्यम से स्वेच्छासेवियों के साथ जुड़कर काफी उत्साहित है, क्योंकि स्वेच्छासेवियों के साथ इंटरएक्टिव सत्रों ने उसे इस चुनौतीपूर्ण समय का सामना करने में मदद की है. रूपाली अपने स्कूल में टाटा स्टील के हेड बिजनेस परफार्मेंस पल्लव गर्ग द्वारा आयोजित एक दिलचस्प सत्र में हिस्सा लिया.

‘फरिश्ता’ के तहत, कर्मचारी नियमित रूप से विद्यार्थियों के रेसीडेंशियल ब्रिज स्कूलों, वृद्घाश्रमों और एचआईवी पॉजिटिव बच्चों के लिए विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित कर रहे हैं, जिन्हें अतिरिक्त देखभाल और यान की आवश्यकता होती है, क्योंकि ये सभी अपने आवास स्थलों में सिमटे हुए हैं और आम तौर पर इनसे कोई संपर्क नहीं करता है. ‘फरिश्ता’ प्रोग्राम 26 मार्च से शुरू हुआ और तब से लेकर अब तक इस प्रक्रिया में 120 से अधिक कर्मचारी 1294 लोगों तक पहुंच बनाकर 125 घंटे की स्वेच्छा सेवा प्रदान की है. टाटा स्टील के एक्जीक्यूटिव इंचार्ज एफएएमडी एमसी थॉमस द्वारा स्टील और आयरन के निर्माण पर आयोजित एक सत्र में हिस्सा लेने वाली सोनिया मुंडा ने बताया कि उन्होंने गाँवों में खदानों के बारे में सुना था. खदानों के बारे में थॉमस सर के बताने से पहले, खदानों के बारे में सोच कर हमको आश्चर्य होता था.

उन्होंने इसे इतनी खूबसूरती से समझाया कि अब मैं खनन और उत्खनन प्रक्रिया की कल्पना कर सकती है. इस पहल को काफी उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है और इसने टाटा स्टील फाउंडेशन को 14 सेंटरों की साझेदारी में प्रारंभिक दो लोकेशन से वर्तमान में नौ लोकेशन, जमशेदपुर, दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलुरु, विशाखापत्तनम, मुंबई और कोलकाता तक इस पहल को विस्तारित करने के लिए प्रेरित किया. ऑनलाइन सत्र लेने के अलावा, कुछ लोगों ने समुदायों की मदद करने के लिए अपने अनूठे तरीके से अतिरिक्त प्रयास भी किये हैं. टाटा स्टील के सीएसएम साउथ-चेन्नई अमित रंजन ने बेंगलुरु स्थित नारायण हृदयालय अस्पताल में नर्सिंग की प्रशिक्षुओं के साथ एक सत्र संचालित करते समय महसूस किया कि वे पैसे की कमी के कारण अपने मोबाइल फोन को रिचार्ज करने में असमर्थ थे. समस्या की गंभीरता को समझते हुए, उन्होंने सभी 18 प्रशिक्षुओं के सेल फोन पर एक महीने का रिचार्ज करने की पेशकश की. ऑपरेशन टीमों से आदित्य सारदा और शिवम राय 30 लड़कियों के साथ पिपला के कैंप स्कूलों से जुड़े थे. उन्होंने कैंप की छात्राओं को बुनियादी वैज्ञानिक अभ्यास के बारे में बताया. आदित्य का मानना है कि लड़कियां वास्तव में स्मार्ट हैं. उन्होंने बताया, ’’वे हमारे साथ अपनी राय व्यक्त करने के लिए स्वेच्छा से आगे आयीं. वास्तव में, सत्र के अंत में वे हम पर सवालों का बौछार कर रही थी, जबकि हम जवाब देने के लिए अपने सिर खुजला रहे थे. इसके अलावा, कई प्रकार की गतिविधियों में मनोरंजक वर्क-आउट सत्र, विज्ञान कक्षाएं, भाषण प्रतियोगिताएं, पोषण पर बातचीत और आयात्म पर बातचीत आदि कुछ उल्लेखनीय गतिविधियां है, जो फरिश्ता के तहत संचालित की जा रही हैं. टाटा स्टील इस अभूतपूर्व संकट के समय में अपने समुदायों के साथ एकजुट होकर खड़ी है, और दिनों-दिन बदलती स्थितियों के अनुसार अपने समुदायों तक सार्थक रूप से पहुंचने की उम्मीद करती है.





