
आदित्यपुर : भले कृषि बिल 2020 को लेकर देशभर के किसान आंदोलित है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा किए गए घोषणा 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कैसे हो इसको कृषि वैज्ञानिक साकार करने में जुटे हुए हैं. शुक्रवार को सरायकेला- खरसावां जिला के गम्हरिया प्रखंड कृषि विज्ञान केंद्र में 10वें वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक हुई. बैठक में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय रांची के विशेषज्ञ एवं वैज्ञानिकों ने शिरकत की. जानकारी देते हुए केंद्र संचालक ने बताया कि झारखंड राज्य पहले जहां 28 लाख टन अनाज का उत्पादन करती थी, आज 55 लाख टन अनाजों का उत्पादन कर आत्मनिर्भर बन चुका है. उन्होंने भविष्य में इसे और बढ़ने की संभावना प्रकट की. उन्होंने बताया कि वर्तमान में झारखंड 18 से 20% सिंचित क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है. 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में एक फसल की पैदावार हो रही है, जबकि 12 लाख हेक्टेयर भूमि में दोहरा फसल उगाया जा रहा है. (नीचे भी पढ़ें)

उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहां वर्तमान समय में तीन फसल लगाए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि झारखंड के किसानों को धान के अलावा क्षेत्र के वातावरण के अनुसार फसल लगाने की जरूरत है, जिससे 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो सके. इसके लिए सभी 24 जिलों के कृषि विज्ञान केंद्र लगातार प्रयासरत हैं. उन्होंने पड़ोसी जिला जमशेदपुर के पटमदा क्षेत्र का हवाला देते हुए बताया कि अकेले पटमदा पूरे जमशेदपुर में सब्जी मुहैया करा रहा है. अन्य जिलों को भी इस दिशा में पहल करने की जरूरत है, ताकि दूसरे जिलों के बड़े कारोबारी यहां की मंडियों की ओर आकर्षित हो सके. साथ ही मत्स्य पालन, बागवानी एवं पशुपालन के क्षेत्र में भी राज्य आत्मनिर्भर होने की ओर अग्रसर है. इन क्षेत्रों में भी असीम संभावना होने की बात उन्होंने कही. मौके पर मौजूद किसानों एवं पदाधिकारियों को कई जरूरी टिप्स भी दिए गए. जिससे उन्नत कृषि एवं बागवानी के अलावा पशुपालन एवं मत्स्य पालन कर किसानों की आय दोगुनी कराई जा सके.



