
जमशेदपुरः भारत वर्ष में आज ही के दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 21 दिन का लॉकडाउन घोषित कर दिया था. तभी से सारे लोग घरों में कैद हो गए. पूरे भारत वर्ष में मानो तो सड़के सूनी पड़ गई थी. प्रातः उठते सिर्फ पक्षियों की चहचहानें की आवाजें सुनाई देती थी. रात के नौ बजे हो या सुबह के दस सड़के उसी प्रकार सूनी रहती थी. लोगों का घरों से निकलना बहुत कम हो गया था. इस महामारी के कारण कईयों ने अपनो को खोया वहीं कईयों ने लॉकडाउन में नए काम के जरिए देश को गौरवांवित किया. इसी के साथ नई तकनीको का भी प्रयोग किया गया. जहां बच्चे स्कूल जाकर पढ़ाई करते थे, वहीं बच्चे स्कूल की पढ़ाई घर बैठें आनलाइन माध्यम से किया जा रहा था. लॉकडाउन की ही देन है कि जूम एप व गूगल मिंट एप का प्रचलन बढ़ गया. इसी के साथ घर-घर इंटरनेट की सुविधा के लिए डाटा केबल को सस्ता कर दिया गया है. लॉकडाउन में टेलीकॉम कंपनी ने खूब पैसे कमाएं है, सस्ते डाटा होने के कारण घर-घर टेलीकॉम की छतरी नजर आने लगी. वहीं स्कूलों द्वारा आनलाइन क्लासेर्ज लिया जाने लगा. बिना कोई विकल्पों के लोगों को घर में सुविधा अनुसार कार्य करना पड़ रहा था. वहीं अब लॉकडाउन हटा दिया गया है परन्तु अभी भी देश की आर्थिक स्थिति पटरी पर नहीं आई है, परन्तु उम्मीद है आने वाले वर्षो में आर्थिक स्थिति ठीक हो जाएगी. वहीं लॉकडाउन के कारण डाटा का घरो में ख्पत बढ़ गयी. इसी के साथ लॉकडाउन आफिसियल कार्य भी घर से ही होने लगे है. ये मुमकिन सिर्फ और सिर्फ नए तकनीकों के कारण ही हुआ है. बस अंतर इतना है कि बच्चों मोबाइल के आदि होते जा रहे है. इन आदतो से घर में कलेश उतपन्न हो रही है. बच्चें पढ़ाई कर रहे है या कोई और कार्य इसका ध्यान उनके माता- पिता रखना होगा. नए तकनीकों ने इंटरनेट की भूमिका को काफी हद तक बढ़ा दिया है. आज घर बैठे सारे काम करने के लिए सक्ष्म है भारत. सुपर मार्केट के कार्य में तेजी आ गयी. लोग घर बैठे सुई से लेकर बड़े सामान तक आर्डर कर सकते थे. वहीं इस नई तकनीकों के कारण घर से दूर रह रहे लोगों को भी देखने का जरिया बन गया.




