
चतरा : झारखंड के श्रम मंत्री अपने चतरा स्थित गांव में सोमवार को धान की खेती में परिश्रम करते नजर आए. चतरा के गांव पहुंचे और किसानी करने लगे. वे जमीन से जुड़े रहते है और वे लगातार किसानी करते है और किसानों के मुद्दे उठाते रहते है. वे खुद खेतों को चलाया और कहा कि वे किसान का बेटा है इसलिए कृषि को बढ़ावा देना, मेरा फर्ज है. प्रदेश के अन्नदाताओं से अपील करते हुए श्रम मंत्री ने कहा कि लोग खेती कर अपने-अपने गांव में बढ़ाये, अन्न का उपज बढ़ाये क्योंकि अगर उपज ज्यादा होगी तो महंगाई पर रोक लगेगा. कोरोना जैसे महामारी को लेकर भी कहीं बड़ी बात कहां नित्य कार्य करने वाले मेहनत करने वाले, जो खेतों में कार्य करते है, कृषि कार्य करते है, उनका शारीरिक योग हो जाता है और योग से हर बीमारी दूर हो ता है. मोकत्मा पंचायत स्थित अपने पैतृक गांव में वे अपने परिजनों के साथ मिलकर धान की खेती में हाथ बंटाए. (नीचे देखे पूरी खबर और तस्वीरें)

वे कभी हल-बैल पकड़कर धान की फसल के लिए खेत की जुताई कर उसे तैयार कर रहे हैं तो कभी धान के तैयार बिचड़ा को एक खेत से दूसरे खेत में पहुंचाते देखे गए. इस दौरान धनरोपा में भी मदद कर रहे हैं. धानरोपा से पहले मंत्री तैयार धान के बिचड़े को एक खेत से लेकर दूसरे खेत में पहुंचे. श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने बताया कि वे हर वर्ष धान के फसल के समय अपने गांव आते हैं और खेती में हाथ बंटाते हैं. उन्होंने कहा कि गांव में आज भी जीविकोपार्जन का आधार खेती है. धान के उत्पादन में हमारा एक विशेष स्थान है. अपना काम करने में हमें कोई शर्म और संकोच नहीं होना चाहिए.

श्रम मंत्री ने कहा कि किसानों को जागरुक करने का समय आ गया है. उन्हें अपने खेतों में एक फसल की जगह बहुफसलीय खेती के बारे में विचार करना चाहिए. धान के अलावा किसानों को धान की खेती के साथ साथ टमाटर, लौकी, कोहड़ा और मकई का भी खेती करनी चाहिए. इससे किसान आर्थिक रूप से भी सुदृढ़ होंगे. उन्होंने बताया कि किसानों को प्रशिक्षित करने की दिशा में पहल करेंगे.




