
रांचीः झारखंड राज्य के डीजी कमल नयन चौबे अब पूर्व डीजी कहलाएंगे, आज वे सेवानिवृत हो गए. इसके लिए डोरंडा जैप ग्राउंड में उनके लिए एक विदाई समारोह का आयोजन किया गया. इस दौरान श्री चौबे ने कहा कि सेवानिवृत के बाद क्या करना है इसके बारे में सोचा नहीं है. लेकिन इतना जरुर कहा कि वे जो भी काम करेंगे और सभी के बीच रहेंगे. उन्होंने अपने कार्यकाल की यादें को अपने दिल में हमेशा संजो कर रखने की बात कही.
उन्होंने जवानों को संदेश दिया कि अपने परिवार वह बच्चों का भी ख्याल रखें. अभियान में वह महीनों घर से बाहर रहते हैं, इसके बावजूद जब भी घर लौटे बच्चों को पूरा समय दें. बच्चों में अच्छी शिक्षा वह अच्छा संस्कार दें. श्री चौबे ने वर्तमान हेमंत सोरेन की सरकार, सभी ब्यूरोक्रेट्स विधायिका न्यायपालिका का भी आभार जताया. वर्तमान डीजीपी नीरज सिन्हा को विशेष रूप से धन्यवाद दिया और कहा कि जितने गंभीर पदाधिकारी हैं इस महकमे को शिखर तक पहुंचाएंगे ऐसा उन्हें विश्वास है.
अपने कार्यकाल पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों से नक्सली पैर फैलाने की कोशिश करते रहे हैं और हमारी परीक्षा लेते रहे हैं. हमें गर्व है कि शुरुआत के दिनों में जब संसाधनों का अभाव था तब हमने हमारे पदाधिकारियों ने अपना बलिदान देकर नक्सलियों के खिलाफ कारगर कार्रवाई की. उन्होंने शांतिपूर्ण मतदान कराया. यह भी कहा कि झारखंड एक उद्योग प्रधान राज्य है यह औद्योगिक केंद्र है. अर्बन व इंडस्ट्रियल सेंटर की अपनी परेशानी होती है. इसे भी पुलिस ने बखूबी संभाला. साइबर क्राइम की चुनौतियां सामने आ रही है पुलिस ने यहां भी निपटने में बेहतर प्रदर्शन किया.

इसके बावजूद चाहे हम कितना भी बेहतर करें कितने भी अच्छे हो जाएं उसमें सुधार की गुंजाइश बनी रहती है. जिनके टैक्स की बदौलत विकास होता है समय वेतन मिलता है उनके प्रति भी हमारी जिम्मेदारी बनती है. उन्होंने पुलिस को नसीहत दी कि अगर कोई परेशान व्यक्ति अपनी परेशानी लेकर पुलिस के पास जाता है तो उसकी परेशानी को धैर्य से सुनने की जरूरत है। पुलिस को संवेदनशील होने की जरूरत है. आइपीएस अधिकारी कमल नयन चौबे आठ जून 2019 को झारखंड के नए डीजीपी बनाए गए थे.विदित हो कि डीजी कमल नयन चौबे मूल रूप से बिहार के कैमूर जिले के सुल्तानपुर गांव के रहने वाले हैं. इनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में हुई,इसके बाद की पढ़ाई दिल्ली विवि से की. इतिहास विषय की विशेष जानकारी है. उनके बडे भाई राजीव नयन चौबे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी है. उनके पिता उमाकांत चौबे भी प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे. इनकी गिनती तेज-तर्रार अफसरों में की जाती है. वे डीजीपी बनने से पहले बीएसएफ में एडीजी ऑपरेशन थे. पूर्व में वे संयुक्त बिहार में देवघर, बेगुसराय, अररिया, लखीसराय, जमशेदपुर के भी एसपी रह चुके हैं. वे लंबे समय तक केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल व मंत्री दिग्विजय सिंह के ओएसडी भी रह चुके. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटने के बाद वर्ष 2014 में जैप के एडीजी बनाए गए. इसके बाद फिर 2016 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए थे और तब से बीएसएफ के आईजी फिर एडीजी बने.





