
रांची : झारखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी ऑथोरिटी ने अपनी सख्ती शुरू कर दी है. बिल्डरों पर नकेल कसा जा रहा है. इस कड़ी में साफ तौर पर ऑथोरिटी ने आदेश दे दिया है कि रियल एस्टेट रेगुलेटरी ऑथोरिटी (रेरा) से रजिस्ट्रेशन कराये बगैर किसी भी प्रोजेक्ट का काम शुरू नही कर सकते है. हर तिमाही में प्रोजेक्ट को स्टेटस अपडेट करने का आदेश जारी किया गया है. अब रेरा प्रोजेक्ट में देर करने वाले के खिलाफ सीधे तौर पर कार्रवाई की जायेगी. अगर रेरा को जानकारी नहीं दी गयी तो बिल्डर पर फाइन लगाया जायेगा. एक्ट के तहत कार्रवा की जायेगी. इसके तहत तय किया गया है कि प्रोजेक्ट में अगर देरी किया गया और रेरा को जानकारी नहीं दी गयी तो कुल प्रोजेक्ट का लागत खर्च का 5 से 10 फीसदी तक जुर्माना बिल्डरों से वसूलने का आदेश दिया गया है. रेरा के तहत फाइन वसूलने की बात तो कहीं है, लेकिन फ्लैट बुक कराने वालों के लिए किसी तरह की राहत नहीं दी है. दूसरी ओर, रेरा के तहत बिल्डरों को पेपर जमा करने को कहा गया है. इसके तहत रेरा ने 124 प्रोजेक्ट को राज्यभर में रोक दिया है क्योंकि उनके दस्तावेज पूर्ण नहीं थे. अगर दस्तावेज पूर्ण नहीं किया गया तो उनके प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी जा सकती है.
क्या है रेरा का नियम
रियल एस्टेट रेगुलेटरी एक्ट (रेरा) के तहत रियल एस्टेट विनियमन और विकास अधिनियम 2016 को भारत की संसद का एक अधिनियम है, जिसके तहत घर खरीददारों के हितों की रक्षा करने के लिए और अचल संपत्ति उद्योग में अच्छे निवेश को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है. बिल को राज्यसभा और लोकसभा से पारित किया गया है. इसके तहत 92 में से 69 अधिसूचित वर्गों के साथ 1 मई 2016 को इसको अस्तित्व में लाया गया था. इस अधिनियम को बिल्डरों, प्रमोटरों और रियल एस्टेट एजेंटों के खिलाफ शिकायतों में बढ़ोत्तरी के अनुसार बनाया गया है. इन शिकायतों में मुख्य रुप से खरीददार के लिए घर कब्जे में देरी, समझौते पर हस्ताक्षर रकरने के बाद भी प्रमोटरों का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार और कई तरह की समस्याएं है. रेरा एक सरकारी निकाय है, जिसका एकमात्र उद्देश्य खरीददारों के हितों की रक्षा के साथ ही प्रमोटरों और रियल एस्टेट एजेंटों के लिए एक पथ रखा है, ताकि उनको बेहतर सेवाओं के साथ आगे आने का मौका मिल सके.





