जमशेदपुर:धालभूम क्लब साकची में स्व. डीएन उपाध्याय की स्मृति में गुरुवार को श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में ‘ ध्रुव- एक दिव्यात्मा का आलोकवरण ‘ स्मृति ग्रंथ का भी लोकार्पण किया गया. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली के लोकायुक्त हरिश चंद्र मिश्रा, विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति चंद्रशेखर सिंह, झारखण्ड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रौशन, न्यायमूर्ति राजेश कुमार, झारखण्ड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अपरेश सिंह, खूंटी के जिला जज संजय कुमार और उद्घाटनकर्ता पूर्वी जमशेदपुर के विधायक सरयू राय उपस्थित थे. इस पुस्तक में कुल 66 आलेख हैं जो साहित्यकारों ,परिचितों के द्वारा दिए गए हैं.कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, एवं डीएन उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण के साथ किया गया. स्वागत भाषण उनकी पुत्री शुचि के द्वारा दिया गया.उनकी धर्मपत्नी श्रीमती एंजिल उपाध्याय ने अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए एक भावपूर्ण कविता ‘तुम ठीक तो हो’ सुनाई जिसको सुनकर सब द्रवित हो गए.कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए विधायक सरयू राय ने कहा कि सत्ता के दो अंग विधायिका और न्यायपालिका इस तरह घुल मिल गए हैं कि कौन किसको प्रभावित कर रहा है और कौन किसको नियंत्रित कर रहा समझ नहीं आता है. .(नीचे भी पढ़े)

आज भी लोगों को न्यायालय से उम्मीदें हैं मगर न्यायालय मुकदमों के बोझ से लदी हैं. हालांकि आज मौका दूसरा है फिर भी ये बातें कह रहा हूं.ऐसे मुद्दों पर बेबाक राय से कुछ बदलाव की कोशिश होनी चाहिए. दिवंगत न्यायमूर्ति डीएन उपाध्याय भी बदलाव की कोशिशों पर जोर देते थे.शिक्षक कुमार अमलेंदु ने दिवंगत डीएन उपाध्याय पर लिखित पुस्तक के बारे में लोगों को जानकारी देते हुए बताया कि इसमें दिवंगत उपाध्याय के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को अनेकों आलेखों के माध्यम से दर्शाया गया है.इस मौके पर मुख्य वक्ता न्यायमूर्ति संजय कुमार ने कहा कि दिवंगत न्यायमूर्ति डी एन उपाध्याय एक ऐसे कर्मठ इंसान थे कि वे अपना हर काम पूरी शिद्दत से करते थे.वे अपने जूनियर्स से हमेशा उनकी समस्याओं के बारे में पूछते रहते थे. .(नीचे भी पढ़े)
लोकायुक्त रहते कई बदलाव वे चाहते थे जिसको अमल में लाकर उनको सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है.राज्य भर के अधिवक्ताओं की तरफ से राजेश कुमार शुक्ल ने दिवंगत न्यायमूर्ति डी एन उपाध्याय को श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कुछ पुरानी बातें साझा की.वहीं नमन के संस्थापक अमरप्रीत सिंह काले ने कहा कि बीमार होने के बावजूद उनके हौसले में कोई कमी नहीं थी. आज वे भले ही भौतिक रुप से उपस्थित नहीं लेकिन उनकी यादें सबके दिलों में जीवित रहेगी.विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने कहा कि दिवंगत न्यायमूर्ति दिवंगत डीएन उपाध्याय को भुलाना मुश्किल है.(नीचे भी पढ़े)
न्याय के क्रम में कई बार सच जानना मुश्किल हो जाता है, ऐसे में एक बार अपनी उलझन दिवंगत उपाध्याय से साझा की तो उन्होंने स्वविवेक से चलने और अंतर्रात्मा की बात सुनने की सलाह दी.ये बातें ताउम्र याद रहेंगी.झारखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अपरेश सिंह ने दिवंगत न्यायमूर्ति डीएन उपाध्याय को याद करते हुए कहा कि वे पीठ पीछे मेरी प्रशंसा किया करते थे जो बहुत याद आती है.वे एक मजबूत और निर्भीक इंसान थे.वे कठोर वाणी का प्रयोग करने से नहीं हिचकते थे.





