जमशेदपुर : करीम सिटी कॉलेज की साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ आर्ट एंड कल्चर, ‘स्पार्क’ के तत्वधान में विगत संध्या ‘आईना-ए-शब 0.6’ मुशायरे का आयोजन हुआ. इस ऑनलाइन मुशायरे में देश के विभिन्न भागों के समकालीन शायरों एवं श्रोताओं ने शिरकत की. मुशायरे की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ मोहम्मद रेयाज ने की, जबकि शुरुआत कन्वेनर डॉ एस एम यहिया इब्राहीम ने कराई. उन्होंने शायरों तथा श्रोताओं का स्वागत करते हुए शायरों का परिचय भी प्रस्तुत किया. (नीचे भी पढ़ें)
मुशायरे की शुरुआत अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ सरवर साजिद के कलाम से हुई –
इस समझदारी पे दिल की हैं बहुत शर्मिंदा
शाख के हिलने को तूफान समझ लेते हैं ।
उनके बाद कोलकाता के नौजवान शायर शारिक रेयाज ने अपनी रचना पेश की –
चारों जानिब है एक सहरा सा
उसमें दरिया तलाश करता हूं।
अगले शायर, पटना से जुड़े अविनाश अमन ने अपना कलाम पेश किया –
दे रहे हैं वो दुहाई अब खुदा के नाम पर
यारों ने कितने किए करतब खुदा के नाम पर
उनके बाद जमशेदपुर के गौहर अजीज ने अपनी ग़ज़ल पढ़ी –
दिल की तारीकी इन आंखों से मिटाना होगा
इन चिरागों को सरेशाम जलाना होगा
लखनऊ से जुबेर अंसारी ने अपने शेर पढ़े –
लाख दरिया समेट ले खुद को
हम उसी तिश्नगी से मिलते हैं।
अंतिम शायरा के रूप में गया की सदफ इकबाल जुड़ीं जिन्होंने अपनी खूबसूरत आवाज में खूबसूरत कलाम सुनाया –
रगे खयाल को सौतो सदा से बाहर रख
मरीजे इश्क हूँ मुझको दवा से बाहर रख।
मुशायरे का संचालन प्रसिद्ध शायर गौहर अजीज ने किया. अंत में स्पार्क के कोऑर्डिनेटर एवं मुशायरे के कन्वेनर डॉ एसएम यहिया इब्राहिम ने धन्यवाद ज्ञापन किया.



