नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने सर्वाइकल के कैंसर के तेजी से प्रसार को गंभीरता से लेते हुए इसके खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है. इसके तहत सरकार स्कूलों के जरिये 9 से 14 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियों के टीकाकरण का राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करेगी ताकि उन्हें असमय मौत के मुंह में जाने से बचाया जा सके. सरकार ने यह निर्णय उस समय लिया है, जब हाल ही एक अध्ययन में सामने आया है कि एशिया में गर्भाशय कैंसर से सर्वाधिक मौतें भारत में होती हैं, जबकि चीन इसके बाद दूसरे नंबर पर है. (नीचे भी पढ़ें)

सर्वाइकल कैंसर उपचार से रोके जाने एवं उपचार किये जाने लायक कैंसर है, जो ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) के संक्रमण के कारण होता है. हालांकि कैंसर उत्पन्न करने वाले ह्यूमन पेपिलोमा वायरस के संक्रमण को टीकाकरण के जरिये रोका जा सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसकी रोकथाम के लिए कई दिशा निर्देश निर्धारित किये हैं. इस तेजी से पांव पसार रही बीमारी के खात्मे के लिए इन दिशा निर्देशों का सभी देशों द्वारा पालन किया जाना जरूरी है. इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्पष्ट किया है कि सभी देशों को एक वर्ष में प्रति 1,00,000 महिलाओं में ग्रीवा कैंसर के चार से कम नये मामले होने की दर तक पहुंचना होगा एवं यह स्तर बरकार रखना होगा. इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए यह जरूरी है कि 90 फीसदी लड़कियों को 15 वर्ष की आयु तक एचपीवी वैक्सीन का पूर्ण टीकाकरण कराया जाय. (नीचे भी पढ़ें)

इसके लिए यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यूआइपी) में एचपीवी वैक्सीन को शामिल करने का सरकार का निर्णय काबिलेतारीफ है. भारत के टीकाकरण नेटवर्क ने कोविड-19 टीकाकरण के दौरान स्पष्ट कर दिया है कि वह कारगर तरीके से काम कर सकता है. सरकार ने सर्वाइकलकैंसर से लड़ने के लिए आगामी वर्ष 2023 में देश में विकसित सर्वावैक वैक्सीन के टीकाकरण का अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है. इस वैक्सीन को भारत के औषधि महानियंत्रक की मंजूरी मिल गई है और यूआइपी कार्यक्रम में इसके इस्तेमाल के लिए टीकाकरण के लिए राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह ने भी इसकी मंजूरी दे दी है. सरकार ने यह टीकाकरण मुख्य रूप से स्कूलों के जरिए प्रदान कराने का निर्णय लिया है, लेकिन सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि स्कूल नहीं जाने वाली लड़कियों तक सामुदायिक संपर्क और मोबाइल टीमों के जरिए पहुंचा जाएगा. टीकाकरण के साथ ही सही समय पर उपचार के लिए इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों का पता लगाने के लिए जांच कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने की भी जरूरत है.



