अनिल कुमार/ बोकारो : स्थानीय पचौरा बस्ती के विस्थापितों ने सोमवार को अपनी मांगों को लेकर सरकार पर जमकर हमला बोला. नेताओ ने कहा कि उन्होंने सेल को नहीं, बिहार सरकार को अपनी जमीन दी थी, लेकिन सरकार ने उस जमीन का न तो आजतक मुआवजा दिया और ना ही हमे पुनर्वासित किया है. उन्होंने कहा कि ऐसे में नियमानुसार हमारी जमीनें रैयतों को वापस किये जाने का प्रावधान है, किन्तु यह सरकार उत्तरी विस्थापित रैयतों को उनके हक एवं अधिकार से वंचित कर रखा है. (नीचे भी पढ़ें)
बताते चलें कि विस्थापित रैयत अपनी मांगों को लेकर विगत 7 फरवरी, 2022 से ही आंदोलित हैं, इन विस्थापितों ने बीएसएल की महत्वपूर्ण वाटर सप्लाई पाइपलाइन बिछाने के कार्य का विरोध शुरू किया है. इसके बाद से कार्य रुका हुआ है. सोमवार को रैयतों एवं विस्थापित परिवारों ने महाजुटान सह मिलन समारोह का आयोजन किया, जिसमें मीडिया कर्मियो से बात करते हुए विस्थापित नेता रघुनाथ महतो ने कहा कि उतरी विस्थापित परिवार अपने मुआवजे,पुनर्वास की लड़ाई वर्षो से लड़ते आ रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल पाया है. उन्होंने कहा कि न्याय मिलने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी. (नीचे भी पढ़ें)
वहीं अबोध गोस्वामी ने कहा कि रैयतों ने स्टील प्रबंधन को नहीं, बल्कि बिहार सरकार को जमीन दी थी. लेकिन उसके बदले में हमें कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गयी. जिस काम के लिए हमने जमीन दी थी वह काम शुरू नहीं हुआ, ऐसे में नियम कहता है कि रैयत ही उस जमीन का मालिक है.





