नीमडीह : शनिवार को नीमडीह प्रखंड के झिमड़ी के सोनाडुंगरी स्टेडियम में आदिवासी कुड़मी समाज के तत्वावधान में एक दिवसीय महाजुटान हुआ. जिला प्रभारी प्रभात कुमार महतो की अध्यक्षता में हुए इस जुटान में झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा से भी कुड़मी समाज के हजारों बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि आदिवासी कुड़मी समाज के मूलखूंटी मुलमान्ता अजीत प्रसाद महतो ने कहा कि कुड़मी समाज अपने अधिकार की लड़ाई के तहत समाज को जागरूक कर रहा है. इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य कुड़मी को अनुसूचित जनजाति में सूचीबद्ध कराना, कुड़माली को आठवीं अनुसूची में शामिल कराना एवं सरना धर्म कोड लागू कराना है. उन्होंने कुछ दिनों से कुछ तथाकथित आदिवासियों द्वारा कुड़मियों का इतिहास जाने बिना ही अनर्गल बयानबाजी किये जाने का आरोप लगाते हुए इसे भटकाने का प्रयास करार दिया. उन्होंने कहा कि कुड़मी समाज अब जाग चुका है और कितनी ही बाधाएं आयें, वह अपना अधिकार ले कर ही रहेगा.(नीचे भी पढ़ें)
इसके अलावा सभा में आंदोलन की आगे की रूपरेखा भी तैयार की गयी एवं संगठन के आगे के कार्यक्रमों पर भी विचार किया गया. कार्यक्रम के अति विशिष्ट अतिथि पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने कहा कि झारखंड राज्य बनने के तीन वर्ष बाद, 23 नवंबर 2004 को अर्जुन मुंडा सरकार ने कुड़मी जनजाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की अनुशंसा की थी. वर्तमान में अर्जुन मुंडा स्वयं केंद्र सरकार में आदिवासी मंत्रालय के मंत्री हैं. उन्होंने पिछले दिनों 12 जनजातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाया, लेकिन 2004 में स्वयं द्वारा अनुशंसित कुड़मियों को छोड़ दिया. इसीलिए आज हम आन्दोलन को बाध्य हैं. इसी तरह कार्यक्रम में उपस्थित अन्य पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे.



