जमशेदपुर : जमशेदपुर के कदमा थाना क्षेत्र में रंगदारी के मामले में गैंगस्टर अखिलेश सिंह को साक्ष्य के अभाव में कोर्ट में बरी कर दिया गया है. सोमवार को जमशेदपुर कोर्ट के एडीजे 4 राजेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत में गवाही हुई थी. यह मामला तत्कालीन कदमा थाना के इंस्पेक्टर विष्णु देव चौधरी के बयान पर दर्ज कराया गया था. उन्होंने कोर्ट में बयान दिया था कि मामला काफी पुराना हैं, इसलिए वे आरोपियों की पहचान नही कर सकते हैं. उल्लेखनीय हैं की तत्कालीन कदमा थाना के इंस्पेक्टर विष्णु देव चौधरी ने आरोपी पंकज दुबे को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी. पूछताछ में पंकज दुबे ने बताया था कि वे लोग कुख्यात अखिलेश सिंह के नाम से शहर के व्यवसायियों से रंगदारी की मांग करते थे. इस मामले में विष्णु देव चौधरी के बयान पर अखिलेश सिंह (दुमका जेल में बंद), पंकज दुबे (हजारीबाग जेल में है), मोहम्मद जमील, कामरान अहमद, प्रभास सिंह, भोला सिंह उर्फ मनोरंजन सिंह, मनोरंजन सिंह उर्फ लल्लू के खिलाफ कदमा थाने में मामला दर्ज किया गया था. इस केस में अखिलेश सिंह की ओर से अधिवक्ता प्रकाश झा, विद्या सिंह ने केस की पैरवी की. इस मामले में चार लोगों की गवाही हुई थी. संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने सभी को बरी कर दिया. (नीचे भी पढ़ें)
जेल में मोबाइल मिलने के मामले में अखिलेश बरी
एक अन्य मामले में जमशेदपुर कोर्ट के एसीजेएम की अदालत में भी गैंगस्टर अखिलेश सिंह समेत तीन लोगों को बरी कर दिया गया. यह मामला है घाघीडीह जेल का, जहां गैंगस्टर अखिलेश सिंह जेल में बंद था. उसी दौरान छापामारी की गयी थी, जिसमें मोबाइल मिला था. इस मामले में अखिलेश सिंह, अमलेश सिंह, उमेश राय समेत अन्य पर जेल में मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए रंगदारी की मांग करने का केस दायर किया गया था. इस मामले में भी कोर्ट ने तीनों को बरी कर दिया. इस मामले में भी अधिवक्ता प्रकाश झा, विद्या सिंह ने पैरवी की थी. (नीचे भी पढ़ें)
जयराम सिंह हत्याकांड में
टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी जयराम सिंह हत्याकांड में जमशेदपुर कोर्ट के एडीजे वन संजय कुमार उपाध्याय की अदालत में जयराम सिंह के भतीजे अनिल सिंह की गवाही हुई. इस मामले में धनबाद में पदस्थापित एमजीएम अस्पताल के पोस्टमार्टम के चिकित्सक डॉ जे श्रीनिवास राव की भी गवाही हुई. डॉक्टर ने अपने पोस्टमार्टम रिपोर्ट की बातों को सही ठहराया जबकि जयराम सिंह के भतीजे ने अपनी गवाही में बताया कि वह घर पर था तब तक फोन आया कि चाचा को गोली मार दी है. जब वे पहुंचे तो देखा कि उनकी मौत हो चुकी है. घटना के दिन 4 अक्टूबर 2008 को दुर्गापूजा के दौरान जयराम सिंह अपनी पोती के साथ जमशेदपुर के जुबली पार्क से मॉर्निंग वार्क कर बाग-ए-जमशेद के पास से घर की तरफ जा रहे थे. इस बीच मोटरसाइकिल पर सवार अपराधियों ने उन्हे गोली मारकर भाग गए थे. गोली लगने से वे घायल हो गये थे और उन्हें इलाज के लिये टीएमएच में भर्ती कराया गया था. जहां इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गयी थी. घटना के बाद जयराम सिंह के बेटे के बयान पर अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था. अभी मामले में और पांच लोगों की गवाही होगी. गवाही के समय अदालत में विक्रम शर्मा उपस्थित थे.



