जमशेदपुर : टाटा मोटर्स के जमशेदपुर प्लांट में तीन साल के स्किल्ड ट्रेनिंग (टीएमएसटी) के प्रशिक्षुओं ने ट्रेनिंग सेंटर में पहुंचने के बाद जमकर बवाल काटा. बताया जाता है कि स्किल्ड ट्रेनिंग पूरी कर चुके प्रशिक्षुओं की बहाली में एक बड़ा रोड़ा उत्पन्न हो गया है. प्रशिक्षुओं का आरोप है कि पूर्व में हुए समझौता के अनुसार, इस साल के बोनस समझौता के दौरान भी यह तय हुग़ा था कि अक्तूबर से उनकी बहाली प्रक्रिया शुरू होगी. इस योजना के तहत 25-25 का बैच में नियुक्ति करने की बात कही गयी थी. उन्हें पांच दिन शॉप फ्लोर और एक दिन मैनेजमेंट ट्रेनिंग सेंटर (एमटीसी) अरका जैन यूनिवर्सिटी के माध्यम से ट्रेनिंग दी जायेगी. यह भी तय हुआ था कि कंपनी के खर्च पर उन्हें डिप्लोमा कराया जायेगा और उसके बाद ही कंपनी में उनको नौकरी मिलेगी. यह भी प्रावधान किया गया था कि जो कर्मचारी पुत्र या पुत्री आगे बढ़ना चाहते है, उन्हें बीटेक और एमटेक तक की पढ़ाई अरका जैन यूनिवर्सिटी से कंपनी द्वारा करायी जायेगी. रजिस्टर्ड वार्ड को फिक्स्ड टर्म इंप्लायमेंट (एफटीए) के तहत ट्रेनिंग देकर डिप्लोमा, बीटेक आदि की पढ़ाई की व्यवस्था कर प्रशिक्षित मैनपावर को कंपनी में बहाल किया जायेगा. तीन साल का डिप्लोमा पूरा करने के बाद ये प्रशिक्षु आगे चलकर सुपरवाइजर या एसोसिएट जैसे पदों के लिए आवेदन कर सकते थे और कंपनी में निकलने वाली बहाली में शामिल होकर पदोन्नति भी पा सकते है. लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है. ट्रेनिंग में जाने वाले युवाों का कहना है कि कंपनी और टाटा मोटर्स यूनियन के बीच पहले ही सहमति बन चुकी थी कि टीएमएसटी प्रशिक्षुओं को सीधे तौर पर कंपनी में बहाल किया जायेगा. (नीचे भी पढ़ें)
शुक्रवार को मैनेजमेंट ट्रेनिंग सेंटर (एमटीसी) में बुलाकर उनकी नियुक्ति से पहले नेशनल अप्रेंटिस प्रमोशन स्कीम (नैप्स) के जरिये ट्रेनिंग कराने की बात कही जा ही है. अब अचानक थर्ड पार्टी नैप्स के माध्यम से ट्रेनिंग का प्रस्ताव आने से ट्रेनिंग पर जाने वाले लोगों को लग रहा है कि उनकी सीधी बहाली के वादे से प्रबंधन पीछे हट रहा है. उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि नैप्स ट्रेनिंग के बाद उनकी बहाली नहीं होगी. उन्हें एमटीसी में कहा गया है कि थर्ड पार्टी नैप्स के माध्यम से ही भविष्य में उनका कैंपस होगा, जिससे प्रशिक्षुओं में आक्रोश है. इस मामले को लेकर टाटा मोटर्स वर्कर्स के महामंत्री आरके सिंह ने मैनेजमेंट से बातचीत कर रास्ता निकालने का आश्वासन दिया है. इस आश्वासन के बाद ट्रेनीज वापस लौटे. लगभग 148 प्रशिक्षु है, जिनको तीन साल का स्किल्ड ट्रेनिंग टीएमएसटी पूरी कर चुके है और नियोजन के इंतजार में बैठे हए है.



