जमशेदपुर : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने अपने परिवार के साथ सरहुल का पर्व मनाया. जमशेदपुर के घोड़ाबांधा स्थित अपने पारिवारिक आवास में पारंपरिक तरीके से पूजा अर्चना की. इस मौके पर उनके साथ उनके बेटे डॉ अभिषेक मुंडा, उनकी पत्नी मीरा मुंडा समेत पूरा परिवार मौजूद थे. इस अवसर पर झारखंडवासियों के विकास और समृद्धि की कामना की. प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और आदिवासी संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को संजोए रखने का यह पर्व हमें पर्यावरण के संरक्षण और सामूहिक सद्भाव का संदेश भी देता है. पारंपरिक रुप से साल के पेड़ की डाली गाड़कर पूजा अर्चना की गयी. यहां पर सरहूल पर लोगों ने पारंपरिक तरीके से अपने-अपने कानों पर सखुआ का फूल लगाकर सरखोसी की. सखुआ का फूल लगाकर पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य के बीच यह पूजा अर्चना की गयी. (नीचे भी पढ़ें)

इस दौरान पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा ने कहा कि सरहुल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी जनजातीय परंपराओं, सामुदायिक एकता और प्रकृति के सम्मान का जीवंत प्रतीक है. इस अवसर पर श्री मुंडा ने कहा कि सरहुल पर्व झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, प्रकृति के प्रति गहरी आस्था और सामुदायिक एकता का जीवंत प्रतीक है. यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा करने का संदेश देता है. उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण, जंगलों की कटाई और जैव विविधता के संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है. ऐसे समय में सरहुल जैसे पारंपरिक पर्व हमें प्रकृति के साथ संतुलित और सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की सीख देते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
श्री मुंडा ने कहा कि सरहुल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी जनजातीय परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के साथ गहरे संबंध का प्रतीक है. यह पर्व समाज में पारस्परिक सद्भाव, सहयोग और एकता को मजबूत करता है तथा हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है. उन्होंने आगे कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा करना केवल आदिवासी समाज की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और मानवता की सामूहिक जिम्मेदारी है. प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की हमारी पारंपरिक संस्कृति आज वैश्विक पर्यावरण संकट के समाधान की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करती है.







