रामगोपाल जेना/चाईबासा : बंदगांव के कोमडेला में मानकी-मुंडा सलाहकार जोहन चांपिया की अध्यक्षता में एक आम सभा आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न पंचायतों के हजारों लोग शामिल हुए. जोहन चांपिया ने कहा कि वर्ष 1996 में पेसा कानून बना, लेकिन आज तक वह लागू नहीं हो सका, जिसके कारण आदिवासियों का अस्तित्व, जल जंगल, जमीन एवं मालिकाना हक छीना जा रहा है. इसलिए हमें सरकार से पेसा कानून लागू कराने के लिए जनांदोलन शुरू करना पड़ेगा. पेसा कानून जबतक लागू नहीं होगा, पंचायत चुनाव का विरोध करना होगा, पंचायत चुनाव से मुंडा मानकी व्यवस्था चरमरा गई है, आदिवासियों के अधिकारों का हनन हो रहा है. (नीचे भी पढ़ें)
समाजसेवी लक्षूराम मुंडरी ने कहा कि आदिवासियों को अधिक से अधिक शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए, ताकि विल्किन्सन रूल, संविधान एवं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें. इस बैठक में जेवियर हमसहाय ने कहा कि अपने हक आधिकार की सुरक्षा के लिए ग्राम सभा को सशक्त करना होगा और एक लिखित आवेदन तैयार करके सरकार को पेसा कानून लागू कराने के लिए चिठ्ठी दी जाएगी, साथ ही विभिन्न बुद्धिजीवियों ने अपने हक आधिकार के बारे में चर्चा की. बैठक में निर्मल हपदगड़ा, सिबलन हेंब्रम, जुनुल डहंगा, राजेंद्र चांपिया, जेम्स मुंडा, अरुण टोप्नो के अलावा हजारों लोग उपस्थित थे.



