जमशेदपुर : फुटबॉल के विकास को लेकर अपनी मजबूत नींव और दूरदर्शी प्रयासों के लिए जमशेदपुर एफसी को इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ ग्रासरूट्स प्रोग्राम अवॉर्ड’ से नवाज़ा गया है. क्लब ने न सिर्फ युवा प्रतिभाओं को तराशने में उल्लेखनीय कार्य किया है, बल्कि कोच शिक्षा में निवेश कर और स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित कर फुटबॉल संस्कृति को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाया है. इस सुव्यवस्थित, समावेशी और प्रेरणादायक पहल के चलते जमशेदपुर एफसी को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुआ है. (नीचे भी पढ़ें)

जमशेदपुर एफसी के ग्रासरूट कार्यक्रम की नींव उसके फुटबॉल स्कूल हैं, जो शहर के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में संचालित हो रहे हैं. इन स्कूलों में यू5, यू7, यू9, यू11 और यू13 श्रेणियों के तहत 350 से अधिक बच्चे प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं. इनका उद्देश्य सिर्फ खेल सिखाना नहीं, बल्कि बच्चों में खेल के प्रति जुनून जगाना, उनके कौशल को तराशना और उन्हें नियमित खेल का अवसर प्रदान करना है, ताकि कम उम्र से ही वे फुटबॉल की बुनियादी समझ और अनुशासन को आत्मसात कर सकें. क्लब ने अपनी इस पहल को शहरी दायरे से आगे ले जाते हुए, टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से ग्रामीण झारखंड में भी व्यापक स्तर पर विस्तार किया है. यहां जमशेदपुर एफसी तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ कोचों को प्रशिक्षित कर स्थानीय स्तर पर फुटबॉल प्रतिभाओं को मंच देने का कार्य कर रहा है. जमशेदपुर सुपर लीग, जो अब अपने तीसरे संस्करण में प्रवेश कर चुकी है, जमशेदपुर एफसी के ग्रासरूट इकोसिस्टम की रीढ़ बन चुकी है. (नीचे भी पढ़ें)
इस लीग में 70 टीमों के 628 बच्चे—लड़के और लड़कियां—भाग ले रहे हैं, जहां खेल में सहभागिता के साथ-साथ तकनीकी और व्यक्तिगत कौशल को निखारने पर खास ज़ोर दिया जाता है. इस लीग की एक अनोखी और सराहनीय पहल है ‘फादर्स डिवीजन’ और ‘मदर्स डिवीजन’, जिसमें बच्चों के माता-पिता भी सक्रिय रूप से मैदान पर उतरते हैं. यह पहल न सिर्फ परिवारों को खेल से जोड़ती है, बल्कि पूरे शहर में फुटबॉल को एक उत्सव की तरह जीवंत कर देती है. जमशेदपुर एफसी ने ‘जमशेदपुर गोल्डन बेबी लीग’ के जरिये ग्रासरूट फुटबॉल में एक नई मिसाल कायम की है. यह देश की सबसे लंबी चलने वाली बेबी लीग बन चुकी है, जिसने खेल को सिर्फ प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि एक उत्सव का रूप दिया. इस अभूतपूर्व लीग में 108 टीमों और 971 बच्चों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने कुल 11,928 मिनट तक फुटबॉल खेला और 1,525 गोल दागे. सिर्फ खिलाड़ियों के विकास तक सीमित न रहते हुए, क्लब ने कोचिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत किया है. अब तक जमशेदपुर से 40 डी-लाइसेंस और ग्रासरूट स्तर के प्रशिक्षक तैयार किए जा चुके हैं. यह पहल दर्शाती है कि क्लब न केवल भविष्य के सितारों को तराश रहा है, बल्कि उनके लिए योग्य मार्गदर्शक भी तैयार कर रहा है. जमशेदपुर एफसी के चेयरमैन चाणक्य चौधरी ने इस प्रतिष्ठित सम्मान पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि यह उपलब्धि सिर्फ एक अवॉर्ड नहीं, बल्कि वर्षों की दूरदर्शिता, समर्पण और ज़मीनी प्रयासों की पहचान है. उन्होंने कहा, “हमारी टीम ने यह सुनिश्चित करने के लिए अथक मेहनत की है कि हर बच्चा—चाहे उसका लिंग, सामाजिक पृष्ठभूमि या क्षमता कुछ भी हो—फुटबॉल से जुड़े और इस खेल के मूल्यों को आत्मसात करे. हम इंडियन सुपर लीग के आभारी हैं कि उन्होंने हमारे प्रयासों को सराहा, और हम अपने इस सफर को और भी जोश के साथ जारी रखेंगे, ताकि जमशेदपुर पूरे देश में ग्रासरूट फुटबॉल का एक आदर्श मॉडल बन सके. इंडियन सुपर लीग द्वारा दिया गया यह सम्मान भारत के खेल भविष्य में ग्रासरूट फुटबॉल की अहमियत को और भी मजबूत करता है. जमशेदपुर एफसी के लिए यह अवॉर्ड केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है, जिसे क्लब पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ आने वाले वर्षों में और अधिक उत्साह के साथ निभाने के लिए तैयार है.




