वेटिकन : पोप फ्रांसिस अब हमारे बीच नहीं रहे. उन्होंने 88 वर्ष की आयु में सोमवार 21 अप्रैल को अंतिम सांस ली. वेटिकन के कासा सांता मार्टा स्थित अपने निवास पर स्थानीय समयानुसार सुबह 7.30 बजे उनका निधन हुआ. वेटिकन समाचार के मुताबिक, वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे. बीते दिन ईस्टर के अवसर पर लंबे समय के बाद वे लोगों के सामने आए थे. (नीचे भी पढ़ें)
पोप फ्रांसिस जेसुइट ऑर्डर से पहले और 8वीं शताब्दी के बाद से यूरोप के बाहर से पहले पोप थे. अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में जन्मे पोप फ्रांसिस का नाम जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो रखा गया था. उन्हें वर्ष 1969 में कैथोलिक पादरी नियुक्त किया गया था. 28 फरवरी, 2013 को पोप बेनेडिक्ट XVI के इस्तीफे के बाद 13 मार्च को एक पोप सम्मेलन ने कार्डिनल बर्गोग्लियो को उनका उत्तराधिकारी चुना. उन्होंने सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी के सम्मान में फ्रांसिस को अपना पोप नाम चुना. अब आधिकारिक शोक की 14 दिन की अवधि होगी, जिसके बाद कार्डिनल मसीह के नए विकर का चुनाव करने के लिए सम्मेलन में जाएंगे. (नीचे भी पढ़ें)
पोप फ्रांसिस लंबे समय से बीमार चल रहे थे. लगभग एक महीने तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद पोप 24 मार्च को अपने निवास स्थान कासा सांता मार्टा लौटे थे. अस्पताल से लौटने पर उन्होंने बड़ी संख्या में अस्पताल के बाहर जमा हुए लोगों को आशीर्वाद दिया था. सार्वजनिक रूप से पोप को देखने के बाद लोग काफी खुश दिखे थे और जयकारे भी लगाए थे. (नीचे भी पढ़ें)
पोप फ्रांसिस को 14 फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्हें डबल निमोनिया हो गया था. अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चला. एक महीने से ज्यादा समय अस्पताल में बिताने के बाद उन्हें छुट्टी दी गई थी. पोप की देखभाल करने वाले सर्जरी प्रमुख सर्जियो अल्फिएरी ने बताया था कि उन्हें दवाइयों की जरूरत पड़ती रहेगी. (नीचे भी पढ़ें)
पोप फ्रांसिस जब जवान थे, तब उनके एक फेफड़े में संक्रमण के कारण उसे हटाना पड़ा था। इस कारण उन्हें सांस से जुड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा था. 2023 में भी उन्हें फेफड़ों में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था.
पोप फ्रांसिस भारत आने वाले थे. पिछले साल दिसंबर में केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने बताया था कि पोप फ्रांसिस के 2025 के बाद भारत दौरे पर आने की संभावना है. 2025 को कैथोलिक चर्च ने जुबिली वर्ष के रूप में घोषित किया है. भारत पहले ही पोप फ्रांसिस को आधिकारिक तौर पर आमंत्रित कर चुका था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हें सीधे तौर पर निमंत्रण दे चुके थे. यात्रा पोप की सेहत और सुविधा के अनुसार निर्धारित की जाने वाली थी. (नीचे भी पढ़ें)
पोप फ्रांसिस ने अपने आखिरी संदेश में जरूरतमंदों की मदद करने, भूखों को खाना देने और विकास को बढ़ावा देने वाली पहलों को प्रोत्साहित करने की अपील की थी. ईस्टर पर जारी अपने संदेश में उन्होंने लिखा, ‘मैं हमारी दुनिया में राजनीतिक जिम्मेदारी के पदों पर बैठे सभी लोगों से अपील करता हूं कि वे डर के आगे न झुकें. डर दूसरों से अलगाव की ओर ले जाता है. सभी जरूरतमंदों की मदद करने, भूख से लड़ने और विकास को बढ़ावा देने वाली पहलों को प्रोत्साहित करने के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करें. ये शांति के हथियार हैं, हथियार जो मौत के बीज बोने के बजाय भविष्य का निर्माण करते हैं. मानवता का सिद्धांत हमारे दैनिक कार्यों की पहचान बनने से कभी न चूके.’



