रामगोपाल जेना/चाईबासा : झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली – 2025 में ‘हो’ भाषा के अभ्यर्थियों के लिए राज्य सरकार ने मात्र तीन जिलों, पश्चिम सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम को शामिल किया है. ‘हो’ भाषा के अभ्यर्थियों के लिए खूंटी, रांची, रामगढ़, हजारीबाग, धनबाद, बोकारो, दुमका, गुमला एवं अन्य जिलों को शामिल नहीं किया गया है. इन जिलों में भी ‘हो’ भाषा के अभ्यर्थियों को शामिल कराने को लेकर आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा का प्रतिनिधिमंडल, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के साथ राज्यपाल से मिला. ‘हो’ भाषा को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया गया है. उपर्युक्त जिले में भी ‘हो’ भाषाभाषी लोग निवास करते हैं. इसके बावजूद उपेक्षित किये जाने को लेकर हो समाज के लोगों ने नाराजगी जताई है. (नीचे भी पढ़ें)
इसके साथ ही मुख्यमंत्री से भी मुलाकात का प्रयास हुआ, परंतु मुख्यमंत्री राज्य से बाहर हैं. आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री के कार्यालय पहुंचा और ज्ञापन के माध्यम से उपरोक्त जिलों में भी ‘हो’ भाषा के अभ्यर्थियों के लिए मांग रखी. (नीचे भी पढ़ें)
प्रतिनिधिमंडल में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, आदिवासी ‘हो’ समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष इपिल सामड, उपाध्यक्ष सुरा बिरुली, महासचिव गब्बरसिंह हेम्ब्रम, कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र पुर्ती, संयुक्त सचिव रवि बिरुली, धर्म सचिव सोमा जेराई, प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द बिरुआ, कोषाध्यक्ष शंकर सिधु, जिलाध्यक्ष शेरसिंह बिरुआ, सचिव ओएबन हेम्ब्रम, सदस्य सिकंदर तिरिया आदि मौजूद रहे.



