वॉशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस विधेयक का समर्थन किया है, जिसमें भारत के खिलाफ 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी गई है. ये विधेयक रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्ततम टैरिफ लगाने के लिए है. अमेरिका के इस फैसले के बाद भारत और रूस के तेल पर गहरा असर पड़ने की आशंका है. सैंक्शनिंग रसिया एक्ट 2025 के नाम से जाना जानेवाला यह विधेयक भारत-रूस के बीच ऊर्जा-व्यापार को गहरे संकट में डाल सकता है. यह विधेयक उन देशों पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रावधान करता है जो रूस से तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य ऊर्जा संसाधनों का आयात करते हैं. चूंकि भारत इस वक्त चीन के साथ रूस का सबसे बड़ा कच्चे तेल का खरीदार है, तो भारत पर इसका गंभीर असर होगा. भारत ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 35 प्रतिशत रूसी तेल खरीदा है ऐसे में यह विधेयक भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आयात बिल और चालू खाता घाटे पर बड़ा असर डाल सकता है. (नीचे भी पढ़ें)
रूसी कच्चे तेल पर और प्रतिबंधों की रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया है कि रूसी तेल पर कभी भी वैश्विक प्रतिबंध नहीं लगे थे. दुनिया भर के समझदार निर्णयकर्ता वैश्विक तेल आपूर्ति शृंखलाओं की वास्तविकताओं को जानते थे और यह भी कि भारत जहां से भी संभव हो, एक निश्चित मूल्य सीमा के तहत रियायती तेल खरीदकर वैश्विक बाजारों की मदद कर रहा था. (नीचे भी पढ़ें)
यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रूस ने भारत जैसे देशों को भारी डिस्काउंट पर तेल बेचना शुरू किया. भारत, जिसने 2022 में कुल तेल आयात का सिर्फ 2 प्रतिशत रूस से खरीदा था, वो अब करीब 40 प्रतिशत कच्चा तेल वहीं से खरीद रहा है. यह भारत के लिए न सिर्फ लागत कम करने का जरिया बना, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता भी सुनिश्चित की गई. तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट कहा कि रूस का तेल वैश्विक प्रतिबंधों के दायरे में नहीं है और भारत वैश्विक बाजार को स्थिर बनाए रखने में भूमिका निभा रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने इस विधेयक को “ऑप्शनल” यानी वैकल्पिक बताते हुए कहा है कि वे इसका उपयोग कर सकते हैं या फिर इसे टर्मिनेट भी कर सकते हैं. यह पूरी तरह उनके विवेक पर निर्भर करता है. हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे इस पर “गंभीरता से विचार” कर रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)
इस बीच भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका में सीनेटर लिंडसे ग्राहम से बातचीत कर भारत की ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं से उन्हें अवगत कराया है. उन्होंने 2 जुलाई को कहा था कि भारत का रुख स्पष्ट है कि जहां से सस्ता तेल मिलेगा, वहां से खरीदा जाएगा, क्योंकि देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है. आपको बता दें कि सैंक्शनिंग रसिया एक्ट 2025 का मकसद रूस को यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत के टेबल पर लाना है. यदि रूस ऐसा नहीं करता, या किसी समझौते के बाद फिर हमला करता है, तो अमेरिका यह विधेयक लागू कर सकता है. इसका असर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि उन सभी देशों पर पड़ेगा जो रूस से ऊर्जा खरीदते हैं. चूंकि रूस वैश्विक तेल उत्पादन का करीब 10% हिस्सा रखता है, इसलिए अगर इसकी आपूर्ति बाधित होती है, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 120-130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, और अगर ऐसा होता है तो भारतीय तेल बाजार में भी हड़कंप मच जाएगा.



