देवघर : देवघर मनरेगा कर्मी संघ के उपाध्यक्ष जितेंद्र झा ने राज्य के मुखिया हेमंत सोरेन और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह के नाम एक मार्मिक पत्र लिखा है. मनरेगा कर्मियों की हड़ताल से जहां एक ओर मनरेगा योजनाओं के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के कार्यों में बाधा आई है, वहीं पिछले लगभग 90 दिनों से हड़ताल पर बैठे कर्मियों की माली हालात पूरी तरह चरमरा गई है. वहीं शनिवार को मनरेगा कर्मियों ने राज्य के मुख्यमंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह के नाम एक मार्मिक अपील की है. उन्होंने बताया है कि “दर्द की भी एक सीमा होती है, लेकिन मनरेगा कर्मियों का धैर्य आज भी व्यवस्था से न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है.” मुख्यमंत्री जी एवं माननीय मंत्री जी, आज 90 दिन से अधिक बीत चुके हैं. झारखंड के हजारों मनरेगा कर्मी अपने अधिकार, सम्मान और भविष्य की सुरक्षा की मांग को लेकर संघर्षरत हैं, लेकिन इस संघर्ष के पीछे केवल मांगों की सूची नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की पीड़ा, आंसू और टूटती उम्मीदें भी शामिल हैं. (नीचे भी पढ़ें)
किसी कर्मी के घर में बच्चों की स्कूल फीस बकाया है, किसी के माता-पिता दवा के अभाव में दर्द सह रहे हैं, किसी की बेटी की पढ़ाई रुकने के कगार पर है तो किसी का परिवार कर्ज और आर्थिक तंगी के बोझ तले दबता जा रहा है. सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि जिन कर्मियों ने वर्षों तक गांवों में विकास योजनाओं को सफल बनाने के लिए अपना जीवन खपा दिया, आज वही अपने भविष्य को लेकर असहाय खड़े हैं. पत्र में मुख्यमंत्री को इंगित करते हुए कहा गया है कि ग्राम रोजगार सेवक कोई अस्थायी आंकड़ा नहीं हैं. ये वे लोग हैं जिन्होंने झारखंड के गांवों में सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. अपनी युवावस्था, अपना समय और अपनी ऊर्जा ग्रामीण विकास को समर्पित कर दी. आज जब उनके जीवन की सुरक्षा और सम्मान की बात है,तो वे केवल एक संवेदनशील निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)
वहीं मनरेगा कर्मियों ने मंत्री दीपिका पांडे से भी आग्रह करते हुए कहा है कि आप ग्रामीण विकास विभाग का नेतृत्व कर रही हैं. आपसे हजारों परिवारों को आशा है कि आप केवल विभागीय कार्रवाई की भाषा नहीं, बल्कि संवेदनशील समाधान की पहल करेंगी. एक मां की चिंता, एक पिता की बेबसी और बच्चों के भविष्य की चिंता को समझते हुए कोई सकारात्मक कदम उठाया जाएगा. वहीं कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर कहा है कि यदि ग्रेड पे या अन्य मांगों पर तत्काल निर्णय संभव नहीं है, तो वर्षों से कार्यरत ग्राम रोजगार सेवकों के लिए ग्रामीण विकास विभाग अथवा अन्य उपयुक्त विभागों में सम्मानजनक समायोजन की नीति बनाकर स्थायी समाधान की दिशा में पहल की जाए. आंदोलनरत कर्मियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया रोककर संवाद एवं समाधान का रास्ता खोला जाए. मनरेगा कर्मियों के भविष्य, सेवा सुरक्षा और सामाजिक सम्मान को ध्यान में रखते हुए उच्चस्तरीय वार्ता कर शीघ्र निर्णय लिया जाए. उन्होंने कहा है कि यह केवल कर्मचारियों का मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के अस्तित्व, सम्मान और भविष्य का प्रश्न है. उन्होंने “हमारी मांग संघर्ष की नहीं, समाधान की है” की बात करते हुए विश्वास जताया है कि सरकार संवेदनशीलता और न्याय के मार्ग पर चल कर ऐसा निर्णय लेगी जिसे आनेवाले वर्षों में याद रखा जाएगा.







