जमशेदपुर : टाटा स्टील के वेज रिवीजन समझौता की तारीफ समाजशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता रवींद्र नाथ चौबे ने किया है. श्री चौबे ने एक प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि यह समझौता कर मैनेजमेंट और यूनियन ने काफी बेहतर पहल की है. श्री चौबे ने कहा है कि आज की परिस्थिति में यह बहुत ही श्रेष्ठ और शानदार समझौता है क्योंकि संगठित क्षेत्र के मजदूरों में यह लगभग उच्च श्रेणी का वेतनमान है. श्री चौबे ने कहा है कि इस्पात क्षेत्र के सभी कंपनियों के मजदूरों का वेतन समझौता केंद्र सरकार द्वारा गठित एनजेसीएस द्वारा वर्षों तक साथ साथ होते रहने के कारण वेतनमान निर्धारण करने के साथ साथ वेतन समझौता का एक उदारवादी तथा मजदूर हितैषी परम्परा स्थापित हो गया था. हालांकि, औद्योगिक क्षेत्र में आ रहे बदलाव को भांपकर टाटा स्टील इस एनजेसीएस से अपने को अलग कर ली थी. (नीचे भी पढे)
हालांकि टाटा स्टील का आकलन सही निकला क्योंकि 1990 के बाद अपनाई गई नयी आर्थिक नीति के अनुसार आधुनिकीकरण तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजार सबसे बड़ा सत्य बन कर उभरा और टाटा स्टील ने इसमें छलांग लगा कर सफलता पाई है और आज टाटा स्टील ग्लोबल हो गई है. रवींद्र नाथ चौबे ने कहा है कि वेतन समझौता में मजदूरों के सुख और कुशलता को प्राथमिकता देने के साथ साथ पूंजी निर्माण का भी ध्यान देना है. यह काम केवल उद्योगपतियों का नहीं है बल्कि मजदूरों का भी है. पूंजी और तकनीक के व्यापक फैलाव से पिछले तीस साल में एक तरफ जहां तरह तरह के उद्योग, व्यापार और बौद्धिक सेवाओं का क्षेत्र बहुत व्यापक हुआ है. तकनीकी रूप में शिक्षित हजारों हजार मजदूरों को रोजगार मिलने के साथ साथ मजदूरों, कर्मचारियों का वेतन, भत्ता और अन्य सुविधाएं बढ़ी हैं और इसलिए अब ऐसे मजदूरों को विकासवादी और राष्ट्र वादी होना है. (नीचे भी पढे)
आज की परिस्थिति में टाटा स्टील के मजदूरों को टाटा उद्योग और भारतीय राष्ट्र को विकसित करने में सहयोग करना चाहिए क्योंकि आने वाले कम से कम पचास सालों तक औद्योगिक, मैन्युफैक्चरिंग, सेवाओं, खनन, नये उर्जा क्षेत्रों को विकसित बनाने के लिए सबको एक साथ काम करने की जरूरत है और टाटा स्टील जैसी कंपनी अपने पूंजी को नये उद्यमों में लगा रही है और इसलिए राष्ट्र को विकसित कर रही है. तकनिशियनों को रोजगार दे रही है और सरकार को टैक्स देकर बुनियादी ढांचे विकसित करने में सहयोग कर रही है. इसलिए टाटा स्टील के प्रबंधन को तथा टाटा वर्कर्स यूनियन टीम को बधाई. कभी टाटा स्टील के कर्मचारियों को अपने सालाना बोनस के पैसे से जमशेदपुर शहर में तकनीक संस्थान या जमशेदपुर शहर को देश में एक नंबर बनाने के पर्यावरण और जलशक्ति को विकसित करने के लिए भी सोचना चाहिए.







