जमशेदपुर: सीएसआईआर–राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल) जमशेदपुर द्वारा सीएसआईआर-जिज्ञासा पहल के अंतर्गत जेवियर इंग्लिश स्कूल जमशेदपुर के विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय छात्र भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करना तथा उन्हें अनुसंधान एवं नवाचार के प्रति जागरूक करना था. कार्यक्रम में कुल 66 विद्यार्थियों तथा 3 शिक्षकों ने भाग लिया. कार्यक्रम का शुभारंभ पंजीकरण के साथ हुआ, जिसके उपरांत सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ संदीप घोष चौधरी ने उद्घाटन संबोधन दिया. उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासु बनने तथा वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया. साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को सीएसआईआर-एनएमएल में संचालित विभिन्न अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों की जानकारी भी दी. इस अवसर पर एक सामूहिक छायाचित्र भी लिया गया. प्रतिभागियों का स्वागत डॉ के गोपाला कृष्ण, वैज्ञानिक-जी एवं अध्यक्ष, आईएमडीसी प्रभाग ने किया. उन्होंने राष्ट्रीय विकास में सीएसआईआर-एनएमएल की भूमिका तथा धातुकर्म एवं सामग्री विज्ञान अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डाला तथा विद्यार्थियों को नवाचार एवं वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रति प्रेरित किया. (नीचे भी पढ़ें)

इसके पश्चात डॉ पी श्रीदा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं जिज्ञासा कार्यक्रम की सह-परियोजना प्रमुख ने सीएसआईआर-जिज्ञासा कार्यक्रम पर एक जानकारीपूर्ण प्रस्तुति दी. उन्होंने इस पहल के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह कार्यक्रम विद्यालयी विद्यार्थियों को वैज्ञानिक संस्थानों से जोड़ने तथा उन्हें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है. कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विभिन्न प्रयोगशालाओं का भ्रमण रहा, जहां विद्यार्थियों को सीएसआईआर-एनएमएल की अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं एवं वैज्ञानिक गतिविधियों से परिचित होने का अवसर प्राप्त हुआ. विद्यार्थियों ने क्रीप अध्ययन, एडवांस्ड एनालिटिकल कैरेक्टराइजेशन, ई-कचरा पुनर्चक्रण तथा मेल्टिंग डेमोंस्ट्रेशन सुविधाओं का भ्रमण किया. संवादात्मक सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को वैज्ञानिक उपकरणों, प्रयोगात्मक तकनीकों, सतत प्रौद्योगिकियों तथा सामग्री विज्ञान अनुसंधान के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त हुई. कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने अपने उत्साहपूर्ण विचार व्यक्त करते हुए इस अवसर की सराहना की, जिसने उन्हें वैज्ञानिकों से संवाद करने तथा कक्षा-कक्ष से बाहर वास्तविक अनुसंधान गतिविधियों को समझने का अवसर प्रदान किया.







