
जमशेदपुर : टाटा स्टील द्वारा अपने ब्रांड को लेकर काफी तेजी से कार्रवाई शुरू की है. अपने ब्रांड और परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए जारी प्रयास के तहत टाटा स्टील ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से गुजरात के राजकोट में स्थित श्रीकृष्ण स्टील इंडस्ट्रीज में संयुक्त छापेमारी की. छापेमारी में 600 नकली सॉकेट और 1100 पैकेजिंग सामग्री जब्ती की गई, जिस पर टाटा ब्रांड अंकित था. टाटा स्टील सामग्री की जालसाजी का यह प्रयास उपभोक्ताओं को उतना ही प्रभावित करता है, जितना कि यह टाटा स्टील ब्रांड के नाम को प्रभावित करता है. टाटा स्टील के उत्पादों की गुणवत्ता पर उपभोक्ताओं के मन में काफी आस्था है. टाटा के नाम से बेचे जाने वाले ये नकली सॉकेट टाटा स्टील उत्पादों के गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करते हैं और इस प्रकार के सॉकेट्स पर टाटा ब्रांड नाम का ऐसा अनाधिकृत इस्तेमाल टाटा स्टील की प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. टाटा ट्रेडमार्क सर्वविदित है और इसका ‘लोगो’ विशिष्ट है. इसका एक ब्रांड मूल्य है, जो उत्पाद की गुणवत्ता का मुहर होता है और यह उस विश्वास व निष्ठा पर आधारित होता है, जिसे दशकों से उत्पादों के निरंतर और व्यापक उपयोग से हासिल किया गया है.

छापे में पाया गया कि नकली उत्पादों को बेचने और ग्राहकों को धोखा देने के लिए टाटा के ब्रांड नाम का दुरुपयोग किया जा रहा था. इस मामले में कॉपीराइट एक्ट की धारा 51 और 63 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. टाटा स्टील अपने ‘ट्रेडमार्क’ और ‘लोगो’ के दुरुपयोग और हमारी पूर्व अनुमति के बिना टाटा स्टील और टाटा संस के ‘ट्रेडमार्क’ और ‘लोगो’ के इस्तेमाल की निंदा करता है. ब्रांड प्रतिष्ठा और निष्ठा की रक्षा करने के लिए टाटा स्टील की ब्रांड प्रोटेक्शन टीम उन प्रतिष्ठानों के खिलाफ लगातार निगरानी और कार्रवाई करती है, जो कंपनी के बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन कर रही हैं. टाटा स्टील किसी भी ऐसी गैरकानूनी गतिविधियों के खिलाफ निगरानी और कार्रवाई जारी रखेगी, जो हमारी परिसंपत्ति और हमारे ब्रांड को प्रभावित कर रहे हैं.







