सरायकेला : कोल्हान में इन दिनों मागे पर्व की धूम है. गांव- गांव, शहर- शहर मागे मिलन का आयोजन किया जा रहा है. आपको बता दें कि आदिवासी हो समुदाय इस पर्व को नए वर्ष के रूप में मनाते हैं. मान्यता है कि किसान धान की खेती से निवृत होने के बाद फसल के पैदावार होने की खुशी में इस पर्व को मानते हैं. इस दौरान पारंपरिक अखडा में पूजा- अर्चना के बाद हो समुदाय के लोग मांदर की थाप पर पारंपरिक संगीत के धुन पर नृत्य कर इसका आनंद उठाते हैं. रविवार को सरायकेला विधानसभा अंतर्गत आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में आदिवासी कल्याण समिति की ओर से आयोजित मागे मिलन समारोह में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन एवं उनके छोटे पुत्र बबलू सोरेन शामिल हुए और मांदर बजाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. (नीचे भी पढ़ें)
इससे पूर्व आदिवासी रीति- रिवाज के तहत पूर्व मुख्यमंत्री एवं उनके पुत्र का स्वागत किया गया. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री ने ओत गुरु लाको बोदरा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगों को समृद्धि के इस पर्व की शुभकामनाएं दी और रूढ़िवादी परंपरा को बचाए रखने का संदेश दिया. उन्होंने राज्य में आदिवासियों के हो रहे धर्म परिवर्तन पर चिंता जताई और आदिवासियों से अपने परंपरा को जीवंत रखने एवं ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करने की अपील की. उन्होंने कहा कि मागे पर्व महज एक पर्व नहीं बल्कि आदिवासियों की सांस्कृतिक धरोहर है इसे बचाना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है. मौके पर रंजीत प्रधान, परमेश्वर प्रधान, बुबाई दास आदि मौजूद रहे.



