कोलकाता : पश्चिम बंगाल चुनाव से पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार को यहां 24 केंद्रीय एवं राज्य एजेंसियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की. इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि पश्चिम बंगाल में किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की प्राथमिकता राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करना है. राजनीतिक दलों और अधिकारियों के साथ कई बैठकों के बाद कोलकाता में पत्रकारों से बात करते हुए ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता का हमेशा से शांतिपूर्ण और भागीदारी वाले लोकतंत्र में विश्वास रहा है. उन्होंने कहा, ‘हमारा लक्ष्य बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना है.’ (नीचे भी पढ़ें)
मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रत्येक पात्र मतदाता को अपना मत डालने का अवसर मिलेगा. उन्होंने कहा, ‘किसी भी पात्र मतदाता का नाम हटाया नहीं जाएगा.’ राज्य में चुनावी प्रक्रिया के व्यापक स्वरूप को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लगभग 80000 मतदान केंद्र हैं, जिनमें से लगभग 61000 ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं. उन्होंने कहा कि मतदान प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग राज्य भर के मतदान केंद्रों पर शत प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था करेगा. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने चुनाव संपन्न कराने के लिए कई नये निर्णय लिये हैं. इनमें ईवीएम की गिनती के पहले दो चरणों से पूर्व डाक मतपत्रों की गिनती पूरी कराने, मतदान पूरा होने पर पीठासीन अधिकारी मतदान एजेंटों को फॉर्म 17सी प्रदान करते हैं. ईवीएम की गिनती पूरी होने पर अगर दोनों मतपत्रों का मिलान सुचारू रूप से होता है तो यह ठीक है. मिलान में अगर कोई विसंगति पाई जाती है तो ईवीएम के पूरे वीवीपैट की गिनती मतगणना एजेंट के सामने की जाएगी. ज्ञानेश कुमार ने कहा कि इसके अलावा, कोई हारा हुआ प्रत्याशी अगर मतगणना के सात दिनों के भीतर निर्धारित शुल्क पर अपनी ईवीएम की जांच कराना चाहता है तो यह सुविधा भी उपलब्ध होगी, ताकि इतनी बड़ी प्रणालू का सुचारू रूप से प्रबंधन किया जा सके.







